बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार सुबह 8 बजे जलस्तर 69.94 मीटर पहुंच गया, जो इस साल अब तक का सबसे ज्यादा है। गंगा का पानी तेजी से तटवर्ती निचले इलाकों में फैल रहा है। वहीं, गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी पड़ा है और आसपास की बस्तियों के साथ खेतों में पानी भरने लगा है। सोमवार को बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही।
गंगा में उफान के कारण काशी के कई प्रमुख घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस का मंच पानी में डूब गया और आरती स्थल भी बदलना पड़ा। हरिश्चंद्र घाट पर सड़क पर ही अंतिम संस्कार की स्थिति बन गई है, जबकि मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। दशाश्वमेध से नमोघाट तक एनडीआरएफ और पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है।
बाढ़ का असर नगवां, सोनकर-हरिजन बस्ती और गंगोत्री विहार के आसपास भी बढ़ने की आशंका है। रमना शवदाह स्थल पहले ही पानी में डूब चुका है और सब्जी के खेतों में पानी भरने से किसानों को नुकसान की चिंता है। वरुणा नदी में आई बाढ़ से सलारपुर रेलवे लाइन के किनारे से खालिसपुर, कोनिया पुल और नक्खीघाट तक कई बस्तियां प्रभावित हैं। चमेलिया बस्ती, डिपो कॉलोनी और खालिसपुर में 75 से ज्यादा परिवार बाढ़ की चपेट में हैं।
प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्य तेज कर दिया है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंच चुके हैं। सलारपुर प्राथमिक विद्यालय, सरैया राहत शिविर, सिटी गर्ल्स स्कूल और बड़ी बाजार स्कूल में लोग शरण लिए हुए हैं। रविवार को वरुणा के बाढ़ प्रभावित 49 परिवारों को राशन के पैकेट भी बांटे गए। केंद्रीय जल आयोग और आपदा विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे तक गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है, हालांकि बढ़ने की रफ्तार कुछ कम होने की उम्मीद है।