उत्तर प्रदेश के शामली जिले में हरियाणवी लोक गायक अंकित बालियान की निर्मम हत्या के मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी तूल पकड़ लिया है। शामली पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में अंकित बालियान हत्याकांड के दो मुख्य आरोपी मोहित और सुमित मारे गए। शामली के पुलिस अधीक्षक एन.पी. सिंह के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र में नियमित चेकिंग के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो संदिग्धों ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में दोनों अभियुक्त गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
इस एनकाउंटर के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फैजाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने पुलिस मुठभेड़ की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को किन परिस्थितियों में गोली चलानी पड़ी, इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए। सपा सांसद ने तर्क दिया कि भारतीय कानून और संविधान के तहत बड़े से बड़े अपराधी को सजा देने या फांसी पर लटकाने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है, न कि पुलिस बल को।
सपा नेता अवधेश प्रसाद के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में 'एनकाउंटर संस्कृति' और कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। वहीं दूसरी ओर, शामली पुलिस का दावा है कि मारे गए दोनों आरोपी अंकित बालियान की हत्या की मुख्य साजिश में शामिल थे और उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। पुलिस फिलहाल हत्याकांड के बाकी पहलुओं की जांच कर रही है।