धर्मशाला: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) की 17वीं काशाग और 18वीं निर्वासित तिब्बती संसद के संयुक्त तत्वावधान में 20 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक विशेष शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा और मौन मार्च का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में बीजिंग की दमनकारी नीतियों के खिलाफ 2 जुलाई को आत्मदाह करने वाले 49 वर्षीय तिब्बती देशभक्त लोबसांग पालदेन (उर्फ लोबगा रंगज़ेन) के निधन के 49वें दिन उनकी स्मृति में किया जा रहा है। चीनी प्रशासन द्वारा हाल ही में लागू किए गए 'जातीय एकता प्रोत्साहन कानून' और तिब्बती धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को निशाना बनाने वाले नियमों के विरोध में उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत मैक्लॉडगंज स्थित मुख्य तिब्बती मंदिर (त्सुगलागखांग) में सुबह विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात त्सुगलागखांग परिसर से कचहरी स्थित पुलिस ग्राउंड तक एक मौन पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें निर्वासित तिब्बती समुदाय के नागरिक, बौद्ध भिक्षु और सीटीए का शीर्ष नेतृत्व भाग लेगा। सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का उद्देश्य किसी भी प्रकार के आत्मदाह को बढ़ावा देना नहीं है, क्योंकि प्रत्येक तिब्बती नागरिक का जीवन आंदोलन के लिए अत्यंत बहुमूल्य है।
इसके साथ ही केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने विश्व भर में स्थित 'ऑफिस ऑफ तिब्बत' और विभिन्न तिब्बती बस्तियों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन करने का निर्देश जारी किया है।