नई दिल्ली। भारत को दूरसंचार क्षेत्र में वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने उद्योग जगत से नई सोच और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी दूरसंचार तकनीकों का विकास करेगा जिनका उपयोग पूरी दुनिया कर सके। उन्होंने भारतीय कंपनियों से अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग को बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि आने वाला दशक 6G तकनीक के विकास और विस्तार का होगा।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 की थीम जारी करने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सिंधिया ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र ने दुनिया को जोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, डिजिटल कनेक्टिविटी आज केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, रोजगार और नवाचार का आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत ने 4G के दौर में दुनिया का अनुसरण किया, 5G के विकास में प्रमुख देशों के साथ कदम मिलाकर चला और अब 6G तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
संचार मंत्री ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे केवल भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर उत्पाद विकसित न करें, बल्कि वैश्विक स्तर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार करें। उनका कहना था कि भारतीय स्टार्टअप, टेक कंपनियां और अनुसंधान संस्थान दुनिया की डिजिटल चुनौतियों का समाधान देने की क्षमता रखते हैं। इसके लिए अत्याधुनिक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और अगली पीढ़ी की वायरलेस तकनीकों पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की बढ़ती पहुंच ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों को भी नए अवसर मिले हैं। पूर्वोत्तर राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण स्थानीय उद्यमी और शिल्पकार अब अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अनुसंधान, सेमीकंडक्टर, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल नवाचार में लगातार निवेश बढ़ाता है, तो आने वाले वर्षों में वह वैश्विक दूरसंचार उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 6G तकनीक को लेकर सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बढ़ता सहयोग भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अगले चरण में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम साबित हो सकता है।