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Air India में बड़े बदलाव की शुरुआत, नए CEO तेवोल्दे गेब्रेमरियम ने संभाली कमान

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Posted On:Wednesday, September 9, 2026

टाटा ग्रुप की एयरलाइन Air India में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। एयरलाइन के नए CEO-designate तेवोल्दे गेब्रेमरियम ने आधिकारिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। सोमवार को आयोजित टाउन हॉल मीटिंग में Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने नए CEO को एयर इंडिया के कर्मचारियों से परिचित कराया। कर्मचारियों के साथ तेवोल्दे की यह पहली सीधी बातचीत थी।

इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व ग्रुप CEO रह चुके तेवोल्दे ऐसे समय में एयर इंडिया की कमान संभाल रहे हैं, जब एयरलाइन तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है, लेकिन साथ ही उसे कई ऑपरेशनल चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नए CEO के सामने एयरलाइन के कामकाज को बेहतर बनाने के साथ-साथ यात्रियों का भरोसा मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

सेफ्टी और इंजीनियरिंग पर होगा फोकस

कुर्सी संभालते ही तेवोल्दे गेब्रेमरियम की प्राथमिकताओं में एयरलाइन की फ्लाइट सेफ्टी, इंजीनियरिंग क्षमता और सर्विस क्वालिटी को मजबूत करना शामिल है। एयर इंडिया लगातार अपने विमान बेड़े का विस्तार कर रही है। ऐसे में एयरलाइन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा ऑपरेशनल और मेंटेनेंस सिस्टम तेजी से बढ़ते बेड़े का दबाव संभाल सके।

विमानों की तकनीकी खामियों को समय पर दूर करना और मेंटेनेंस सिस्टम को मजबूत करना नए CEO के लिए अहम काम होगा। इथियोपियन एयरलाइंस में लंबे समय तक नेतृत्व करने के दौरान हासिल किया गया उनका अनुभव इस मोर्चे पर एयर इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

महंगे Aviation Fuel ने बढ़ाया दबाव

एयर इंडिया फिलहाल कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है। महंगा Aviation Fuel एयरलाइन की परिचालन लागत को बढ़ा रहा है। इसके अलावा कई देशों के एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियों और रूट में बदलाव के कारण यूरोप और अमेरिका जाने वाली कुछ उड़ानों का सफर लंबा हुआ है।

रूट बदलने से उड़ानों का समय बढ़ने के साथ-साथ ईंधन और अन्य ऑपरेशनल खर्चों पर भी असर पड़ा है। ऐसे माहौल में एयर इंडिया के नए CEO के सामने लागत को नियंत्रित करते हुए यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद सेवा देने की चुनौती होगी।

Pilot Shortage भी बड़ी परेशानी

एयर इंडिया के लिए पायलटों की कमी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। एयरलाइन तेजी से अपने नेटवर्क और विमान बेड़े का विस्तार करना चाहती है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पायलट और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी।

खर्चों को नियंत्रित करने के लिए नए विमानों की डिलीवरी के शेड्यूल की भी समीक्षा की जा रही है। ऐसे में तेवोल्दे को एयरलाइन के विस्तार और लागत नियंत्रण के बीच संतुलन बनाना होगा।

नए CEO के सामने भरोसा लौटाने की चुनौती

एयर इंडिया के लिए आने वाला दौर काफी अहम है। टाटा ग्रुप एयरलाइन को एक मजबूत ग्लोबल कैरियर के तौर पर स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए सिर्फ नए विमान जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऑपरेशनल विश्वसनीयता, समय पर उड़ान, तकनीकी मजबूती और बेहतर ग्राहक सेवा पर भी लगातार ध्यान देना होगा।

तेवोल्दे गेब्रेमरियम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एयर इंडिया के तेजी से हो रहे विस्तार को मजबूत सिस्टम के साथ जोड़ने की है। अगर वह सुरक्षा, इंजीनियरिंग, स्टाफिंग और सर्विस से जुड़ी समस्याओं को प्रभावी तरीके से दूर करने में सफल रहते हैं, तो एयर इंडिया के परिवर्तन की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।


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