दलीप ट्रॉफी के लिए वैभव सूर्यवंशी को जब उप-कप्तान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब उनके चयन को लेकर कई सवाल उठे थे। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना कुछ लोगों को चौंकाने वाला फैसला लगा था। लेकिन टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ वैभव ने अपने प्रदर्शन और मैदान पर लिए गए फैसलों से साबित किया है कि उन्हें यह जिम्मेदारी देना गलत फैसला नहीं था।
वैभव की लीडरशिप क्वालिटी खास तौर पर DRS यानी Decision Review System के इस्तेमाल में नजर आई है। दलीप ट्रॉफी में उन्होंने अब तक जिन भी मौकों पर DRS लिया है, वे फैसले उनकी टीम के पक्ष में गए हैं। यही वजह है कि उनकी तुलना पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की DRS को लेकर मशहूर समझ से की जाने लगी है।
फाइनल में फिर दिखी समझदारी
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में भी वैभव सूर्यवंशी ने DRS का शानदार इस्तेमाल किया। साउथ जोन की पहली पारी के दौरान ओपनर रिकी भुई के खिलाफ ईस्ट जोन के गेंदबाज मुकेश कुमार की गेंद पर जोरदार अपील हुई।
मुकेश कुमार की गेंद पर विकेटकीपर कुमार कुशाग्र ने रिकी भुई का कैच पकड़ा। गेंदबाज और विकेटकीपर समेत पूरी टीम ने आउट की अपील की, लेकिन मैदान पर मौजूद अंपायर ने अपील को खारिज कर दिया।
इसके बाद ईस्ट जोन की ओर से रिव्यू लेने का फैसला किया गया। यहां वैभव सूर्यवंशी ने अपनी भूमिका निभाई और DRS का इस्तेमाल किया। रिप्ले में यह देखने की कोशिश की गई कि गेंद बल्ले से लगी थी या नहीं। रिव्यू के बाद अंपायर के शुरुआती फैसले को बदला गया और वैभव का फैसला सही साबित हुआ।
हर DRS हो रहा है सही
वैभव की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने DRS लिया, बल्कि महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने सही समय पर रिव्यू लेने का फैसला किया। क्रिकेट में DRS का इस्तेमाल सीमित होता है, इसलिए कप्तान या उप-कप्तान के लिए यह समझना जरूरी होता है कि किस अपील पर रिव्यू लिया जाए और किसे छोड़ दिया जाए।
वैभव ने अब तक जिस तरह से रिव्यू का इस्तेमाल किया है, उससे मैदान पर उनकी क्रिकेटिंग समझ दिखाई देती है। यही वजह है कि उप-कप्तान के तौर पर उनकी भूमिका अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण नजर आ रही है।
धोनी से होने लगी तुलना
महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट में DRS के सही इस्तेमाल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। विकेट के पीछे से गेंद की दिशा, बल्ले से संपर्क और बल्लेबाज की प्रतिक्रिया को देखकर रिव्यू लेने में धोनी की समझ कई बार देखने को मिली है। इसी वजह से DRS को मजाकिया तौर पर ‘Dhoni Review System’ भी कहा जाता रहा है।
वैभव सूर्यवंशी के लगातार सही साबित हो रहे रिव्यू ने इसी तुलना को जन्म दिया है। हालांकि अभी वैभव के करियर की शुरुआत ही हुई है और धोनी जैसे दिग्गज से तुलना करना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतनी कम उम्र में उनका यह आत्मविश्वास निश्चित रूप से ध्यान खींच रहा है।
दलीप ट्रॉफी में उप-कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद वैभव ने जिस तरह मैदान पर फैसले लिए हैं, उससे साफ है कि उनकी भूमिका सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। अगर वह इसी तरह अपनी क्रिकेटिंग समझ और नेतृत्व क्षमता को आगे बढ़ाते रहे, तो आने वाले समय में वह भारतीय क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।