ट्रेन के डिब्बों में सफर करते समय लाल रंग की अलार्म चेन (Alarm Chain) लगभग हर यात्री की नजर में आती है। इसके पास साफ चेतावनी लिखी होती है कि इसका उपयोग केवल आपातकालीन स्थिति में ही करें। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई इस चेन को खींचता है, तो ट्रेन के भीतर और तकनीकी स्तर पर असल में क्या होता है? रेलवे के इस सिस्टम के पीछे एक पूरी इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रक्रिया काम करती है।
चेन खींचते ही क्या होता है तकनीकी बदलाव?
ट्रेन की अलार्म चेन खींचने की प्रक्रिया केवल लोको पायलट (ड्राइवर) को सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम से जुड़ी होती है:
- एयर प्रेशर का रिलीज होना: ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम लगातार एयर प्रेशर (हवा के दबाव) पर काम करता है। जैसे ही कोई यात्री चेन खींचता है, कोच में लगा एक छोटा वाल्व खुल जाता है और ब्रेक पाइप से तेजी से हवा बाहर निकलने लगती है।
- ऑटोमैटिक ब्रेक लगना: एयर प्रेशर ड्रॉप होते ही पहियों पर ब्रेक शू स्वतः चिपकने लगते हैं, जिससे ट्रेन धीरे-धीरे रुकने लगती है।
- लोको पायलट और गार्ड को अलर्ट: इंजन के कैब में लगे प्रेशर गेज में हवा का दबाव अचानक गिरते ही ड्राइवर को पता चल जाता है कि चेन खींची गई है। इसके साथ ही इंजन में ऑडियो-विजुअल अलार्म बजता है और गार्ड को भी तुरंत सूचना मिल जाती है।
रेलवे को कैसे पता चलता है कि चेन किस डिब्बे से खींची गई?
कई यात्रियों को लगता है कि इतनी लंबी ट्रेन में यह पता लगाना मुश्किल है कि चेन किस कोच से खींची गई है, जबकि यह बेहद आसान है:
- बाहर लगा इंडिकेटर (Flashing Light/Lever): जिस कोच से चेन खींची जाती है, उस कोच के बाहरी हिस्से में लगा एक वाल्व या लीवर मुड़ जाता है। आधुनिक डिब्बों में बाहर एक फ्लैशिंग लाइट जलने लगती है और वहां से हवा निकलने की तेज आवाज आती रहती है।
- मैन्युअल रीसेट जरूरी: जब तक रेलवे स्टाफ या आरपीएफ (RPF) जवान मौके पर पहुंचकर उस कोच के वाल्व को मैन्युअली रीसेट (Reset) नहीं करते, तब तक ट्रेन में दोबारा एयर प्रेशर नहीं बनता और ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकती।
चेन खींचने के नियम और कानूनी कार्रवाई
भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत बिना किसी वैध या आपातकालीन कारण के अलार्म चेन खींचना एक दंडनीय अपराध है।
किन स्थितियों में चेन खींचना जायज है?
- बोगी में आग लगना या धुआं उठना।
- किसी यात्री की अचानक गंभीर तबीयत खराब होना (जैसे दिल का दौरा या बेहोशी)।
- ट्रेन में कोई बुजुर्ग, बच्चा या दिव्यांग यात्री छूट जाए और ट्रेन चल पड़े।
- किसी प्रकार की लूट, डकैती या सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा।
गलत इस्तेमाल पर सजा: यदि कोई यात्री अपनी सुविधा, देर से आने वाले साथी को चढ़ाने या बिना ठोस कारण के चेन खींचता है, तो पकड़े जाने पर 1 वर्ष तक की कैद, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा, एक ट्रेन के बेवजह रुकने से पीछे आ रही कई अन्य ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित होता है।