मुंबई। भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान डॉलर की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने और घरेलू बाजार में सकारात्मक निवेश धारणा के चलते रुपये ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की। दिन के अंत में भारतीय मुद्रा छह पैसे मजबूत होकर 95.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई। पिछले चार कारोबारी दिनों में रुपया कुल 97 पैसे की मजबूती हासिल कर चुका है, जिसे बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कारोबार की शुरुआत भी मजबूत स्तर पर हुई थी। शुरुआती सत्र में रुपया बढ़त के साथ खुला और दिनभर इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, डॉलर इंडेक्स की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण मुद्रा बाजार में हलचल बनी रही। हालांकि, दिन के मध्य में रुपया और मजबूत हुआ, लेकिन अंतिम कारोबारी घंटों में कुछ मुनाफावसूली के चलते इसकी बढ़त सीमित हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में डॉलर की मांग में नरमी और घरेलू वित्तीय बाजारों में स्थिरता ने रुपये को समर्थन दिया है। वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेत और विदेशी निवेशकों की रुचि भी मुद्रा को मजबूती देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में तेजी के कारण रुपये पर दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें भविष्य में रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना सकती हैं और आयात बिल बढ़ने की आशंका भी पैदा कर सकती हैं।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेश का रुख भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।