मुंबई: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष और आपूर्ति में रुकावट के खतरों के कारण भारतीय शेयर बाजारों में बीता हफ्ता भारी बिकवाली के नाम रहा। बीते पांच कारोबारी सत्रों में दलाल स्ट्रीट पर मंदी का हाहाकार देखने को मिला, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.68%) की तेज गिरावट के साथ 76,059.77 के निचले स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 566.85 अंक (2.33%) टूटकर 23,767.45 पर आ गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गईं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति (महंगाई) और चालू खाते के घाटे (CAD) पर गंभीर असर पड़ने की आशंका से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों से अपने हाथ तेजी से खींचे हैं। गिरावट का सबसे बड़ा झटका बैंकिंग, ऑटो और ऊर्जा शेयरों को लगा, जिनमें एचडीएफसी बैंक में अकेले 9.40% और एक्सिस बैंक में 7.59% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
आगामी सप्ताह में घरेलू बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे के अपडेट्स, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और घरेलू कंपनियों के पहली तिमाही (Q1) के नतीजों पर निर्भर करेगी। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का यह दौर जारी रह सकता है