भारत में आगामी त्योहारों के सीजन से ठीक पहले चीनी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। देश के विभिन्न खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर छू रही हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग दोनों का बजट प्रभावित हुआ है। उद्योग आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष थोक और खुदरा दामों में आई तेजी के पीछे मुख्य रूप से इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (E20) के तहत गन्ने के बड़े हिस्से का डायवर्जन, असमान मानसूनी बारिश और आगामी अक्टूबर तक समाप्त हो रहे विपणन वर्ष का न्यूनतम कैरी-ओवर स्टॉक माना जा रहा है।
घरेलू बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद सरकार ने शुल्क-मुक्त व्यवस्था (Tariff Rate Quota) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। साथ ही, सट्टेबाजी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए थोक खरीदारों, रिफाइनरियों और मिलों के लिए स्टॉक रखने की सख्त सीमाएं तय की गई हैं। नई आपूर्ति आने तक बाजार को संतुलित रखना प्राथमिक चुनौती बनी हुई है।