चमगादड़ अक्सर ऐसे घातक वायरसों (जैसे निपाह, मारबर्ग, सार्स और कोविड-19 समूह के वायरस) के वाहक होते हैं, जो इंसानों और अन्य जानवरों में गंभीर या जानलेवा बीमारियां पैदा कर सकते हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन वायरसों की मौजूदगी के बावजूद चमगादड़ खुद गंभीर रूप से बीमार क्यों नहीं पड़ते? अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके पीछे मौजूद चमगादड़ों की अनूठी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) के रहस्यों को उजागर किया है।
एंटीबॉडी जीन की दोहरी संरचना: एक दुर्लभ खोज
साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, चमगादड़ों के सबसे बड़े परिवार में एंटीबॉडी बनाने वाले जीनों की दोहरी प्रतियां (Two distinct copies of genes) पाई गई हैं।
सामान्य तौर पर सभी ज्ञात स्तनधारियों (Mammals) के पास इस तरह के जीन का केवल एक ही सेट होता है।
अध्ययन की सह-लेखिका और टुलेन यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर हन्ना फ्रैंक के मुताबिक, स्तनधारियों में ऐसी व्यवस्था पहले कभी नहीं देखी गई। यह खोज बताती है कि चमगादड़ों का इम्यून सिस्टम वायरसों से निपटने के लिए बेहद संगठित और विशिष्ट तरीके से विकसित हुआ है।
बीमारी नहीं, 'सहनशीलता' और नियंत्रित सूजन
विशेषज्ञों का कहना है कि चमगादड़ पूरी तरह से वायरस-प्रूफ नहीं होते, बल्कि उनमें संक्रमण को सहन करने (Viral Tolerance) की असाधारण क्षमता होती है:
- नियंत्रित सूजन (Controlled Inflammation): इंसानों में वायरस से होने वाले कई गंभीर नुकसान हमारे अपने इम्यून सिस्टम की अनियंत्रित प्रतिक्रिया (Hyperactive Inflammatory Response) की वजह से होते हैं। इसके विपरीत, चमगादड़ों का इम्यून सिस्टम वायरस को नियंत्रित भी रखता है और शरीर में जानलेवा सूजन को भी भड़कने नहीं देता।
- उड़ान और मेटाबॉलिक अनुकूलन: उड़ने के लिए चमगादड़ों को भारी ऊर्जा की जरूरत होती है। इस शारीरिक प्रक्रिया के अनुकूलन ने उन्हें कोशिकीय तनाव (Cellular Stress) और सूजन को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना सिखाया है।
- लाखों वर्षों का सह-अस्तित्व: वायरसों के साथ चमगादड़ों का विकास लाखों वर्षों से साथ-साथ हुआ है, जिससे दोनों के बीच एक जैविक संतुलन बन चुका है।
इंसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
जब ये वायरस चमगादड़ से किसी अन्य प्रजाति या इंसानों में फैलते हैं (Spillover), तो नए मेजबान के पास ऐसी जैविक सुरक्षा प्रणाली नहीं होती। यही कारण है कि इंसान निपाह, सार्स या अन्य वायरसों से गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चमगादड़ों की इस प्रतिरक्षा प्रणाली को समझकर इंसानों के लिए ऐसी बेहतर दवाइयां और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी थेरेपी विकसित की जा सकती हैं, जो घातक वायरसों से लड़ते समय फेफड़ों व अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाने वाली सूजन को रोक सकें।
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि चमगादड़ प्रकृति के लिए खतरनाक नहीं बल्कि परागण (Pollination) और कीट नियंत्रण के लिए बेहद आवश्यक जीव हैं। मात्र उनके आसपास होने से संक्रमण नहीं फैलता, जब तक कि उनके शारीरिक तरल या संक्रमित अवशेषों से सीधा संपर्क न हो।