बिहार के मुंगेर जिले की एक अदालत ने ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी की नृशंस हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-IV) कुमारी मनीषा की अदालत ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र में तैनात सहायक अवर निरीक्षक (ASI) संतोष कुमार सिंह की पीट-पीटकर हत्या करने के जुर्म में तीन महिलाओं सहित एक ही परिवार के आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसकी अदायगी न करने पर अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
यह दुखद घटना 14 मार्च 2025 को होली के त्योहार के दिन नंदलालपुर गांव में घटी थी। डायल-112 पर तैनात एएसआई संतोष कुमार सिंह दो पक्षों के बीच हो रहे हिंसक विवाद को शांत कराने और शांति व्यवस्था बहाल करने पहुंचे थे। उसी दौरान उपद्रवियों के समूह ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कैमूर जिले के निवासी शहीद अधिकारी के परिजनों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद राहत लेकर आया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे 'स्पीडी ट्रायल' के तहत चलाया गया। पुलिस द्वारा त्वरित आरोप पत्र दाखिल करने और अभियोजन पक्ष द्वारा समयबद्ध गवाही प्रस्तुत करने के कारण महज कुछ ही महीनों में सुनवाई पूरी कर ली गई। अदालत ने राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी को दोषी करार देते हुए कड़े सुरक्षा घेरे में जेल भेज दिया। इस त्वरित फैसले ने यह कड़ा संदेश दिया है कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।