राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' (NEET-UG) की पुनर्परीक्षा को पूरे देश में विधिक और सुचारू रूप से संपन्न कराने का दावा किया है। परीक्षा के कड़े आयोजन के बाद एनटीए द्वारा जारी कूटनीतिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार परीक्षा में शामिल हुए २२ लाख से अधिक अभ्यार्थियों में से १०,००० से ज्यादा दिव्यांग (PwD) उम्मीदवार शामिल थे। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य संबंधी बेहद गंभीर और विखंडन परिस्थितियों से जूझ रहे ८१ उम्मीदवारों के लिए एजेंसी ने विशेष चिकित्सा प्रावधान और लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं की थीं, ताकि वे बिना किसी कड़े व्यवधान के अपनी परीक्षा पूरी कर सकें।
एनटीए ने सोशल मीडिया पर इस कूटनीतिक मानवीय दृष्टिकोण की सफलता को साझा करते हुए कुछ असाधारण मामलों का उल्लेख किया। परीक्षा में शामिल हुई एक उम्मीदवार सृष्टि दुबे, जो एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं और जिनकी नौ पसलियां टूटने के साथ फेफड़ों में गंभीर चोट आई थी, उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पुनर्परीक्षा दी। एक अन्य उम्मीदवार कीमोथेरेपी के कड़े दर्द के बावजूद परीक्षा केंद्र पहुंचा। सृष्टि के बड़े ऑपरेशन और गहन चिकित्सा (ICU) के बाद उनके परिवार की विधिक अपील पर एनटीए ने परीक्षा केंद्र के ग्राउंड-फ्लोर पर एक विशेष कमरा, निरंतर मेडिकल सपोर्ट और एक स्टैंडबाय एम्बुलेंस की कूटनीतिक व्यवस्था की थी। इस संवेदनशील प्रयास के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद उम्मीदवार के माता-पिता से कूटनीतिक संवाद किया, जिन्होंने सरकार की इस विलेख सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
हालांकि, एक तरफ जहां एनटीए ने चिकित्सा मामलों में विलेख संवेदनशीलता दिखाई, वहीं परीक्षा के विधिक नियमों और समय-सारणी को लेकर उनका रुख बेहद कड़ा रहा। प्रवेश नियमों का सख्ती से पालन करते हुए देश के विभिन्न केंद्रों पर तय समय-सीमा के बाद पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को कूटनीतिक रूप से प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसी कड़े नियम के तहत मध्य प्रदेश के एक परीक्षा केंद्र पर मामूली देरी से पहुंचे एक उम्मीदवार को परीक्षा देने से विधिक रूप से वंचित कर दिया गया, जिससे परीक्षा की शुचिता और कड़े अनुशासन के प्रति एजेंसी की प्रतिबद्धता साफ झलकती है।