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उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का यू-टर्न: दिल्ली-एनसीआर में $93$ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूलभरी आंधी और बारिश से मिली भीषण गर्मी से राहत, हिमाचल में ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान

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Posted On:Tuesday, June 16, 2026

नई दिल्ली/जयपुर: हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुए एक अत्यंत तीव्र नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं के कूटनीतिक मिलन के कारण सोमवार, 15 जून 2026 को उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम तंत्र में विखंडन रूप से बड़ा बदलाव देखा गया। इस मौसमी बदलाव के चलते राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के एक बड़े भू-भाग में भीषण धूलभरी आंधी के साथ हल्की से मध्यम स्तर की मूसलाधार बारिश दर्ज की गई, जिसने पिछले कई हफ्तों से पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ लू (Heatwave) के प्रकोप को विधिक रूप से शांत कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सोमवार दोपहर को दिल्ली के आसमान में काले बादलों की गर्जना के बीच हवा की अधिकतम रफ्तार 93 किलोमीटर प्रति घंटा के खतरनाक स्तर को छू गई, जिससे कई इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली ग्रिड बाधित होने की सूचनाएं भी मिली हैं।

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के विलेख आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच हुई इस तेज बौछारी बारिश ने हवा में आर्द्रता (Moisture) के स्तर को काफी बढ़ा दिया है। दिल्ली के पालम वेदर स्टेशन पर शाम तक सर्वाधिक 9 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) के मौसम विज्ञानियों के अनुसार, पंजाब और सीमावर्ती हरियाणा के वायुमंडल में एक मजबूत चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) विकसित हुआ था, जिसे अरब सागर से आने वाली नमी युक्त दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने लगातार ग्रिड ईंधन प्रदान किया। मौसम विभाग ने कूटनीतिक अनुमान जताया है कि मंगलवार, 16 जून 2026 को भी दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर प्री-मानसून बौछारें गिरती रहेंगी, जिससे न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमशः 27 और 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास विखंडन रूप से बना रहेगा।

इस मौसमी उथल-पुथल का असर पहाड़ी राज्यों पर भी विच्छेद रूप से व्यापक रहा; हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार को भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। वहीं, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुए इस बेमौसम हिमपात और ओलावृष्टि के कारण सेब की कीमती नगदी फसल को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचने की विधिक खबरें हैं, जिससे स्थानीय बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। दूसरी ओर, रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में भी आंधी-पानी का दौर जारी रहा, जहां झालावाड़ जिले के खानपुर ब्लॉक में सबसे अधिक 51 मिलीमीटर की विखंडन मानसूनी वर्षा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि उत्तराखंड और हिमाचल के पर्वतीय अंचलों में आगामी 21 जून 2026 तक मौसम का मिजाज विलेख रूप से खराब बना रह सकता है, जिसके चलते चारधाम यात्रियों को प्रशासनिक सतर्कता बरतने की सख्त सलाह दी गई है।


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