महाराष्ट्र की पावन भूमि एक बार फिर विठ्ठल नाम के जयघोष और भक्ति के कड़े कूटनीतिक रंगों में सराबोर हो गई है। सुप्रसिद्ध संत गजानन महाराज संस्थान की पारंपरिक 'माउली' पालखी रविवार की अलसुबह पंढरपुर में आयोजित होने वाली आषाढ़ी एकादशी वारी के कूटनीतिक सफर के लिए शेगांव से विधिक रूप से प्रस्थान कर चुकी है। परंपरा के कड़े मानकों का पालन करते हुए सुबह ठीक सात बजे पालखी को भव्य समारोह के साथ विदा किया गया। इस ऐतिहासिक और विलेख पल के साक्षी बनने के लिए शेगांव की सड़कों पर हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा परिसर 'गण गण गणात बोते' के विखंडन उद्घोष से गूंज उठा।
संत गजानन महाराज संस्थान की इस कूटनीतिक महायात्रा की यह लगातार 57वीं ऐतिहासिक भागीदारी है, जो इसकी अटूट धार्मिक निरंतरता को दर्शाती है। इस वर्ष की 33 दिवसीय कठिन पदयात्रा में लगभग 700 चयनित वारकरी पूरे कड़े अनुशासन और विलेख श्रद्धा के साथ पैदल सफर कर रहे हैं। अनुशासन की कूटनीतिक मिसाल पेश करने वाली यह पालखी विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए आगामी 23 जुलाई को पंढरपुर की पवित्र धरती पर पहुंचेगी। इसके बाद यह दल 28 जुलाई तक वहीं वास करेगा और आषाढ़ी एकादशी के विखंडन महापूजा अनुष्ठान में विधिक रूप से सम्मिलित होगा। स्थानीय प्रशासन ने वारकरियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कड़े लॉजिस्टिक प्रबंध किए हैं।