राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में ‘कनाडाई हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग’ (CHORD) द्वारा आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु – दुनिया को दोस्ती के साथ अपनाएं’ कार्यक्रम में शिरकत की। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी ने भी आरएसएस प्रमुख के साथ मंच साझा किया।
'हिंदू' शब्द की व्यापक परिभाषा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि जब वह 'हिंदू' शब्द का उपयोग करते हैं, तो इसे किसी एक विशिष्ट भाषा, पूजा-पद्धति या जीवन शैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये सभी विविधताएं इस व्यापक विचार का हिस्सा हैं।
शरण और सहिष्णुता की भारतीय संस्कृति
आरएसएस चीफ ने भारत के प्राचीन इतिहास और संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू समाज हमेशा से सभी का सम्मान और उन्हें स्वीकार करता आया है।
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दुनिया में जब भी किसी पर अत्याचार हुआ, उसे भारत ने हमेशा शरण दी।
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इतिहास में कई लोग भारत पर हमलावर बनकर आए, लेकिन आज वे अपनी विशिष्टताओं के साथ यहीं फल-फूल रहे हैं और गर्व से भारतीय नागरिक हैं।
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देश में मुसलमान, ईसाई और यहूदी समुदाय के लोग भी अल्पसंख्यकों के रूप में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।