वजन घटाने (Weight Loss) के सफर में खानपान का सही चुनाव सबसे महत्वपूर्ण होता है। एक छोटी सी लापरवाही भी आपकी कैलोरी काउंट और मेहनत को खराब कर सकती है। अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि वजन कम करने के लिए सादा गेहूं का आटा बेहतर है या फिर मल्टीग्रेन आटा? इंटरनेट पर इस विषय को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है। इस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Health Experts) का क्या कहना है, आइए जानते हैं।
क्या है दोनों में अंतर?
शारदाकेयर-हेल्थसिटी (ShardaCare-Healthcity) में क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स की प्रमुख डॉ. गरिमा तिवारी के अनुसार, "वजन घटाने के मामले में सामान्य गेहूं का आटा और मल्टीग्रेन आटा दोनों ही सेहतमंद विकल्प हो सकते हैं, लेकिन असल फर्क इनके कंपोजिशन (सामग्री) में होता है।"
- गेहूं का आटा (Whole Wheat Atta): यह पूरी तरह से साबुत गेहूं से बनता है और इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है।
- मल्टीग्रेन आटा (Multigrain Atta): इसमें गेहूं के साथ-साथ अन्य अनाज जैसे ओट्स, जौ (barley), रागी या ज्वार को मिलाया जाता है। इस वजह से इसमें फाइबर और पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य आटे की तुलना में थोड़ी अधिक हो सकती है, जो पाचन को बेहतर बनाने और भूख को नियंत्रित करने में मददगार है।
मल्टीग्रेन आटे का भ्रम और पैकेज्ड प्रोडक्ट्स की सच्चाई
डॉ. तिवारी का कहना है कि मार्केट में मल्टीग्रेन आटे को वजन घटाने के एक अचूक उपाय (panacea) के रूप में प्रमोट किया जाता है, जो कि केवल एक धारणा है, पूरी सच्चाई नहीं।
पैकेज्ड (पैकेट वाले) मल्टीग्रेन आटे को लेकर उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया। डॉ. तिवारी के अनुसार, बाजार में मिलने वाले अधिकांश रेडीमेड मल्टीग्रेन आटे में अन्य अनाजों की मात्रा बहुत ही कम होती है, और उनमें मुख्य रूप से रिफाइंड गेहूं (मैदा या प्रोसेस्ड गेहूं) ही होता है। ऐसी स्थिति में, पैकेज्ड मल्टीग्रेन आटा और सामान्य आटे में बहुत कम अंतर रह जाता है। इसके अलावा, यदि आटा अत्यधिक प्रोसेस्ड है, तो इसके स्वास्थ्य लाभ लगभग खत्म हो जाते हैं।
आटे से ज्यादा क्या मायने रखता है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, वजन घटाने के लिए सिर्फ आटे का प्रकार बदलना काफी नहीं है, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल और खाने का तरीका ज्यादा मायने रखता है:
- पोर्शन कंट्रोल (Portion Control): भले ही आप कितना भी हेल्दी या मल्टीग्रेन आटा खा रहे हों, अगर आप जरूरत से ज्यादा रोटियां खाएंगे, तो वजन बढ़ेगा ही। इसलिए एक बार में आप कितनी रोटियां खा रहे हैं, उसकी मात्रा नियंत्रित करना सबसे जरूरी है।
- ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index): कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को अचानक नहीं बढ़ाते। इससे शरीर में एनर्जी लेवल स्थिर रहता है और असमय होने वाली क्रेविंग्स (भूख की इच्छा) कम होती है।
- संतुलित आहार और एक्टिविटी: वजन कम करना केवल आटे के चुनाव पर निर्भर नहीं है। इसके लिए आपको रोजाना शारीरिक व्यायाम (Physical Activity) करना होगा और अपने भोजन में पर्याप्त प्रोटीन व हेल्दी फैट्स को शामिल करना होगा।
निष्कर्ष: यदि आप मल्टीग्रेन आटे का असली फायदा चाहते हैं, तो बाजार के पैकेट बंद आटे पर भरोसा करने के बजाय खुद घर पर गेहूं में सही मात्रा में चना, रागी, ओट्स या ज्वार पिसवाएं। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप कितनी कैलोरी ले रहे हैं और आपकी शारीरिक सक्रियता कितनी है।