क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सुबह उठने के लिए एक के बाद एक कई अलार्म लगाते हैं, फिर भी बिस्तर छोड़ने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है? अक्सर कहा जाता है कि रात में देर तक जागने वाले (Night Owls) कभी सुबह जल्दी उठने वाले 'मॉर्निंग पर्सन' (Morning Person) नहीं बन सकते। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि महज तीन दिनों में कोई भी व्यक्ति सुबह जल्दी उठने की आदत डाल सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स और स्लीप साइंटिस्ट्स (नींद के विशेषज्ञों) ने इस दावे की सच्चाई को खंगाला है। आइए जानते हैं कि क्या वाकई 3 दिन में सुबह जल्दी उठना मुमकिन है और इसके पीछे का विज्ञान क्या कहता है।
क्या 3 दिन में आदत बदलना संभव है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दावा पूरी तरह सच नहीं है, लेकिन इसके पीछे थोड़ा विज्ञान जरूर है। दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल के पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन विभाग के डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, आप 3 दिनों में सुबह उठने के 'समय' को तो जबरदस्ती बदल सकते हैं, लेकिन अपने शरीर की 'बायोलॉजिकल क्लॉक' (Biological Clock) या क्रोनोटाइप को इतनी जल्दी नहीं बदल सकते।
एक व्यक्ति का देर रात तक जागना या सुबह जल्दी उठना काफी हद तक उसके जीन (Genes) और इंटरनल बॉडी क्लॉक पर निर्भर करता है। इस क्लॉक को पूरी तरह रीसेट होने में कम से कम 2 से 3 हफ्ते का समय लगता है, न कि सिर्फ 3 दिन।
3 दिनों का 'शॉक थेरेपी' फॉर्मूला कैसे काम करता है?
सोशल मीडिया पर वायरल इस 3-दिन के चैलेंज में शरीर को एक तरह की 'शॉक थेरेपी' दी जाती है:
- पहला दिन (सबसे मुश्किल): आप रात में चाहे जितने भी बजे सोए हों, सुबह का एक फिक्स समय (जैसे सुबह 6 बजे) तय करें और अलार्म बजते ही बिस्तर छोड़ दें। इस दिन आपको भारी थकान और सुस्ती महसूस होगी।
- दूसरा दिन: पहले दिन की थकान की वजह से आपको रात में जल्दी नींद आ जाएगी। दूसरे दिन भी बिना कोई ढील दिए उसी तय समय पर उठें।
- तीसरा दिन: तीसरे दिन तक आपका शरीर इस नए समय के साथ थोड़ा तालमेल बिठाने लगता है।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी: भले ही आप इस तरीके से तीसरे दिन सुबह जल्दी उठ जाएं, लेकिन अगर आप इसे लगातार जारी नहीं रखेंगे, तो चौथे या पांचवें दिन वापस अपनी पुरानी आदतों पर लौट आएंगे।
बॉडी क्लॉक को रीसेट करने के 4 वैज्ञानिक तरीके
अगर आप वाकई स्थायी रूप से एक 'मॉर्निंग पर्सन' बनना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट्स ने इसके लिए कुछ आसान और वैज्ञानिक तरीके सुझाए हैं:
- सुबह की धूप (Morning Sunlight): सुबह उठते ही सबसे पहले अपने कमरे के पर्दे खोलें या धूप में जाएं। सूरज की रोशनी हमारे दिमाग को 'मेलाटोनिन' (Melatonin - नींद का हार्मोन) बनाने से रोकती है और शरीर को जगाने का सिग्नल देती है।
- धीमी शुरुआत करें: अचानक 2 घंटे जल्दी उठने का लक्ष्य न बनाएं। अपने उठने के समय को रोज केवल 15 मिनट पहले खिसकाएं।
- गैजेट्स से दूरी: सोने से कम से कम 1 घंटे पहले फोन, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन बंद कर दें। इनकी 'ब्लू लाइट' दिमाग को भ्रमित करती है कि अभी भी दिन है।
- वीकेंड पर भी नियम न बदलें: सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे सोमवार से शुक्रवार तो जल्दी उठते हैं, लेकिन शनिवार-रविवार को देर तक सोते हैं। इससे पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
निष्कर्ष:
यदि आप किसी जरूरी काम या इंटरव्यू के लिए 3 दिन में सुबह जल्दी उठना चाहते हैं, तो यह तरीका काम कर सकता है। लेकिन अगर आप इसे एक स्थायी आदत बनाना चाहते हैं, तो अपने शरीर को थोड़ा समय दें और कम से कम 21 दिनों तक इस रूटीन का पालन करें।