अक्सर घरों में देखा जाता है कि जन्मदिन, एनिवर्सरी, रिश्तेदारों के नाम या परिवार से जुड़ी छोटी से छोटी बातें महिलाओं को उंगलियों पर याद रहती हैं। वहीं पुरुष अक्सर इन चीजों को भूल जाते हैं। इस बात को लेकर हमेशा से एक बहस चलती आई है कि क्या सच में महिलाओं का दिमाग या उनकी याददाश्त (Memory) पुरुषों से बेहतर होती है?
हाल ही में मशहूर न्यूरोसाइंटिस्ट (Neuroscientist) विदिता वैद्य और पॉडकास्टर राज शमानी के बीच हुई बातचीत में इस दिलचस्प मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे केवल जीवविज्ञान (Biology) नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक परवरिश यानी 'सोशल कंडीशनिंग' (Social Conditioning) एक बहुत बड़ा कारण है।
क्या दोनों के दिमाग की बनावट में कोई अंतर है?
जब न्यूरोसाइंटिस्ट विदिता वैद्य से पूछा गया कि क्या याददाश्त से जुड़े दिमाग के हिस्से, जिसे हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) कहते हैं, की बनावट महिलाओं में पुरुषों से बड़ी होती है?
- एक्सपर्ट का जवाब: विदिता वैद्य ने साफ किया कि बड़े स्तर पर पुरुष और महिला के दिमाग की बनावट में कोई बड़ा संरचनात्मक अंतर (Structural Difference) नहीं होता है। दिमाग का एक छोटा हिस्सा, जिसे हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) कहते हैं, उसमें जरूर कुछ अंतर होते हैं, लेकिन दोनों का दिमाग काफी हद तक एक जैसा ही काम करता है।
'मेमरी कीपर' क्यों बन जाती हैं महिलाएं?
विदिता वैद्य के अनुसार, महिलाओं की तेज याददाश्त का एक बड़ा कारण सोशल कंडीशनिंग (सामाजिक परवरिश) है। हमारे समाज में बचपन से ही महिलाओं को इस तरह ढाला जाता है कि वे रिश्तों, तारीखों, पारिवारिक आयोजनों और लोगों की भावनाओं का ध्यान रखें। वे अनजाने में ही अपने परिवार की 'मेमरी कीपर' (यादों को सहेजने वाली) बन जाती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारा दिमाग बेहद लचीला (Adaptable) होता है। जब हम किसी एक तरह की जानकारी पर बार-बार ध्यान देते हैं और उसे याद रखने का अभ्यास करते हैं, तो दिमाग का वह हिस्सा मजबूत हो जाता है। अगर पुरुषों को भी इन चीजों को याद रखने के लिए कोई खास वजह (Incentive) या जिम्मेदारी दी जाए, तो वे भी इसे उतनी ही अच्छी तरह याद रख सकेंगे। पुरुष अक्सर अपने काम से जुड़ी बारीक से बारीक चीजें याद रखते हैं, क्योंकि वहां उनका फोकस ज्यादा होता है।
याददाश्त के अलग-अलग प्रकार: कौन किसमें आगे?
मुंबई के वोकहार्ट हॉस्पिटल की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शीतल गोयल के अनुसार, रिसर्च बताती है कि अलग-अलग तरह के कामों में दोनों की याददाश्त अलग तरह से काम करती है:
- वर्बल और सोशल मेमरी (Verbal & Social Memory): बातचीत को याद रखना, चेहरे पहचानना, शब्दों का इस्तेमाल और भावनाओं से जुड़ी बातें याद रखने में महिलाओं का प्रदर्शन पुरुषों से थोड़ा बेहतर होता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि महिलाएं पारंपरिक रूप से रिश्तों को संभालने और भावनात्मक जुड़ाव में ज्यादा ध्यान लगाती हैं।
- स्पेशियल मेमरी (Spatial Memory): दूसरी ओर, कुछ स्टडीज के अनुसार पुरुषों की 'स्पेशियल मेमरी' यानी रास्तों को याद रखना, दिशाओं का अनुमान लगाना (Navigation) और किसी वस्तु को थ्री-डायमेंशन (3D) में समझने की क्षमता औसतन महिलाओं से थोड़ी बेहतर हो सकती है।
निष्कर्ष
डॉक्टरों का मानना है कि कुल मिलाकर (Overall) किसी की याददाश्त को पूरी तरह श्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता। कोई इंसान कितना बेहतर सीखता है या उसकी याददाश्त कितनी अच्छी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस चीज पर कितना ध्यान देता है, उसकी आदतें कैसी हैं, उसकी शिक्षा और उसका माहौल कैसा है, न कि केवल उसके जेंडर (लिंग) पर।