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महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है रात 11 बजे से पहले सोना? नींद की कमी से प्रभावित हो सकती है फर्टिलिटी और ओव्यूलेशन

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Posted On:Friday, June 12, 2026


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण देर रात तक जागना एक आम आदत बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर से सोने की यह आदत महिलाओं की सेहत पर कितना भारी पड़ सकती है? हाल ही में आए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बयानों के मुताबिक, रात को 11 बजे से पहले सो जाना महिलाओं के हार्मोनल और रीप्रोडक्टिव हेल्थ (प्रजनन स्वास्थ्य) के लिए बेहद जरूरी है। नींद की कमी या गलत समय पर सोने से महिलाओं में ओव्यूलेशन (अंडे बनने की प्रक्रिया) प्रभावित हो सकती है, जिससे कंसीव करने (गर्भधारण) में मुश्किलें आ सकती हैं।
क्या है रात 11 बजे का नियम (11 PM Rule)?
स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) डॉ. महिमा काक नागपाल और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज के अनुसार, महिलाओं के शरीर का हार्मोनल सिस्टम एक प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी 'सार्केडियन रिदम' (Circadian Rhythm) पर काम करता है।
अगर कोई महिला रात में पर्याप्त घंटे की नींद तो ले रही है, लेकिन वह सोती बहुत देर से है, तो इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। रात के पहले हिस्से (यानी 11 बजे से पहले) में शरीर मेलाटोनिन (Melatonin) और ग्रोथ हार्मोन जैसे जरूरी हार्मोन्स बनाता है, जो टिश्यूज की मरम्मत और प्रजनन स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का काम करते हैं।
कौन से हार्मोन्स होते हैं प्रभावित?
डॉक्टरों के मुताबिक, देर से सोने या कम नींद लेने से शरीर में निम्नलिखित हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है:

  • मेलाटोनिन (Melatonin): यह हार्मोन अंडों की क्वालिटी (Egg Quality) को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
  • कोर्टिसोल (Cortisol): नींद पूरी न होने पर यह स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है, जो दिमाग और ओवरीज (अंडाशय) के बीच होने वाले संवाद में बाधा डालता है।
  • LH और FSH: ये हार्मोन्स फॉलिकल के विकास और ओव्यूलेशन के लिए जिम्मेदार होते हैं। नींद की कमी से इनका स्राव भी गड़बड़ा जाता है।
फर्टिलिटी और पीरियड्स पर सीधा असर
लंबे समय तक नींद की कमी या देर से सोने की आदत के कारण महिलाओं में अनियमित ओव्यूलेशन (Irregular Ovulation) और पीरियड्स का चक्र लंबा या अनियंत्रित होने जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। जो महिलाएं मां बनने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें गर्भधारण करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पीसीओएस (PCOS) और वजन बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि क्रोनिक स्लीप डिप्राइवेशन (लगातार नींद की कमी) से न सिर्फ फर्टिलिटी प्रभावित होती है, बल्कि महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance), वजन बढ़ना (खासकर पेट के आसपास की चर्बी) और पीसीओएस (PCOS - पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के लक्षण और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
डॉक्टरों की सलाह
महिलाओं को अपनी सेहत दुरुस्त रखने के लिए हर रात 7 से 9 घंटे की अच्छी और गहरी नींद लेनी चाहिए। इसके साथ ही सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करना (स्लीप हाइजीन) और रात 11 बजे से पहले बिस्तर पर चले जाना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।


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