बनारस न्यूज डेस्क: विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, शिलान्यास हुआ और सरकारी रिकॉर्ड में काम भी पूरा हो गया। लेकिन बाढ़ का पानी बढ़ते ही वार्ड नंबर 43 में विकास की पूरी तस्वीर पानी में डूबी नजर आ रही है। साल 2021 में चौदहवें वित्त आयोग से यहां दो जगह गली निर्माण और रिटेनिंग वॉल का काम कराया गया था।
31.64 लाख की लागत से हुए थे काम
दस्तावेजों के मुताबिक प्यारे लाल मौर्य के प्लॉट से रामबली मौर्य, विजय पटवा के मकान होते हुए रमेश राजभर के मकान तक गली निर्माण और रिटेनिंग वॉल के लिए 17.65 लाख रुपये तय किए गए थे। वहीं, कोनियों में सुनील पांडेय के प्लॉट से सोमनाथ मौर्य के प्लॉट तक इसी काम के लिए करीब 13.98 लाख रुपये की लागत निर्धारित थी। दोनों कामों की कुल अनुमानित लागत 31.64 लाख रुपये थी। दोनों का शिलान्यास 31 अगस्त 2021 को हुआ था।
बाढ़ में डूब गया रास्ता, लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब लाखों रुपये खर्च किए गए थे तो रास्ते को जमीन से कम से कम तीन फीट ऊंचा बनाया जाना चाहिए था। इससे बाढ़ के दौरान रास्ता पानी में नहीं डूबता और लोगों को हर साल अपने ही मोहल्ले में पानी के बीच से निकलने या नाव का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। अब हालात यह हैं कि घरों से बाहर निकलने के लिए लोगों को पानी का स्तर देखकर रास्ता तलाशना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि शिलान्यास के समय विकास जमीन पर नजर आ रहा था, लेकिन बाढ़ आते ही वही विकास पानी के नीचे चला गया। 31 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होने के बाद भी अगर लोगों को रास्ते के लिए पानी में उतरना पड़े, तो सवाल सिर्फ जलभराव का नहीं है। निर्माण की योजना, गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। सरकारी कागजों में गली बन चुकी है, लेकिन बाढ़ के पानी में फंसे लोगों के लिए आज भी रास्ता अधूरा नजर आ रहा है।