बनारस न्यूज डेस्क: हर साल सितंबर में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पोषण माह इस बार बुधवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर से शुरू होगा। इस अभियान का मकसद गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, किशोरों और उनके परिवारों में पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देना है। इस बार राष्ट्रीय पोषण माह का यह 9वां संस्करण होगा।
इस साल अभियान की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसके जरिए लोगों से अपने आसपास के आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी में भागीदार बनने की अपील की जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों की देखभाल, पोषण और शुरुआती शिक्षा से जुड़े सामुदायिक प्रयासों का केंद्र बनाने पर जोर रहेगा। अभियान में पौष्टिक और अलग-अलग तरह के भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और स्थानीय खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और लाभार्थियों को ताजा और पौष्टिक गर्म भोजन मिलने पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित उपस्थिति बढ़ाने, नए आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों के जरिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने और एसएनपी मेन्यू बोर्ड लगाने पर जोर रहेगा। बच्चों के पोषण के साथ उनके मानसिक और बौद्धिक विकास को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। इस साल प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 10 साल पूरे होने के मौके पर गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिनों में मां और बच्चे के पोषण की अहमियत भी बताई जाएगी।
सरकार के मुताबिक, 31 जुलाई तक देश में करीब 13.99 लाख आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां 13.30 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता काम कर रहे हैं और करीब 8.94 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। इनमें 6 महीने से 6 साल तक के 7.2 करोड़ से ज्यादा बच्चे शामिल हैं, जबकि करीब 1.1 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं। पोषण ट्रैकर को आंगनबाड़ी सेवाओं की निगरानी के लिए प्रमुख डिजिटल सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कुपोषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 2018 में पोषण अभियान शुरू किया था, जिसे 2021-22 के बजट के बाद मिशन पोषण 2.0 के तहत एकीकृत किया गया।