जर्मनी के प्रतिस्पर्धा नियामक फेडरल कार्टेल ऑफिस (FCO / बुंडेसकार्टेलम्ट) ने घोषणा की है कि एप्पल अपने आईफोन और आईपैड पर टारगेटेड विज्ञापनों के लिए यूज़र डेटा ट्रैकिंग नियमों में बदलाव करने पर सहमत हो गया है। नियामक द्वारा कंपनी के 'ऐप ट्रैकिंग ट्रांसपेरेंसी' (ATT) फ्रेमवर्क को लेकर सालों से चल रही एंटी-ट्रस्ट (प्रतिस्पर्धा-रोधी) जांच के बाद यह फैसला आया है।
विवाद का मुख्य कारण
जर्मन नियामक की जांच में पाया गया कि एप्पल का मौजूदा ATT सिस्टम प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन करता है:
- पक्षपातपूर्ण नियम (Self-Preferencing): एप्पल ने अपने खुद के ऐप्स के लिए आसान सहमति विकल्प रखे थे, जबकि थर्ड-पार्टी डेवलपर्स (जैसे मेटा/फेसबुक और अन्य ऐप निर्माता) के लिए कड़े और डराने वाले भाषा/प्रतीकों वाले पॉप-अप लागू किए थे।
- थर्ड-पार्टी डेवलपर्स को नुकसान: सख्त और नकारात्मक भाषा वाले ट्रैकिंग प्रॉम्प्ट्स के कारण अधिकांश यूज़र्स ट्रैकिंग से इनकार कर देते थे, जिससे डेवलपर्स के लक्षित विज्ञापन (targeted ads) राजस्व पर भारी असर पड़ रहा था।
समझौते की मुख्य शर्तें और बदलाव
- न्यूट्रल प्रॉम्प्ट्स (तटस्थ सहमति): थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए डेटा ट्रैकिंग सहमति वाले पॉप-अप को दोबारा डिज़ाइन किया जाएगा। इसमें से हतोत्साहित करने वाले शब्द और संकेत हटाए जाएंगे ताकि यह भाषाई और दृश्य रूप से पूरी तरह निष्पक्ष (neutral) रहे।
- 4 महीने की समयसीमा: एप्पल को यह फैसला लागू करने के लिए चार महीने का समय दिया गया है।
- 7 साल की निगरानी: यह समझौता 7 वर्षों तक लागू रहेगा और इसकी निगरानी एक स्वतंत्र ट्रस्टी (Trustee) द्वारा की जाएगी।
- यूरोपीय संघ में विस्तार: यह नए नियम केवल जर्मनी में ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ (EU) के लगभग सभी सदस्य देशों में लागू होंगे।
एप्पल की प्रतिक्रिया और पूर्व में लगे जुर्माने
एप्पल ने कहा कि हालांकि वह अपने मौजूदा ATT प्रॉम्प्ट को यूज़र प्राइवेसी के लिए पारदर्शी और स्पष्ट मानता है, लेकिन नियामक के अनुरोध पर वह इसके फॉर्मेट और टेक्स्ट में बदलाव करने को तैयार है।
गौरतलब है कि इसी ऐप ट्रैकिंग फ्रेमवर्क को लेकर इससे पहले फ्रांस ने एप्पल पर 150 मिलियन यूरो और इटली ने 98.6 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था।