पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन का समापन हो चुका है, लेकिन 20 जुलाई को हुए हिंसक घटनाक्रम की जांच अभी जारी है। ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे।
अब दिल्ली पुलिस इस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का विशेष ध्यान उन लोगों पर है, जिन्होंने चेहरे ढक रखे थे और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
FRS की मदद से की जा रही पहचान
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से बड़ी संख्या में संदिग्धों की पहचान कर रही है। पुलिस ने पहले ही कई संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अब मास्क पहनकर उपद्रव करने वालों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियां प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
400 CCTV कैमरों से जुटाए जा रहे सबूत
दिल्ली पुलिस की टीम ने इलाके में लगे करीब 400 CCTV कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। पुलिस कथित रूप से मास्क पहने लोगों की गतिविधियों का क्रम तैयार कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिंसा के दौरान कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में कुछ लोगों को चेहरे ढककर पुलिस के साथ झड़प करते हुए देखा गया है। पुलिस इन वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
जांच में डिजिटल सबूतों पर जोर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले पर्याप्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। जांच में CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल माध्यमों की मदद ली जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस पहले ही कई धाराओं में कार्रवाई कर चुकी है। अब जांच का मुख्य उद्देश्य हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान करना और उनकी भूमिका स्पष्ट करना है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच जारी है। आने वाले दिनों में पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।