मशहूर अभिनेता और टीवी होस्ट राजीव खंडेलवाल ने हाल ही में अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर एक बेहद प्यारा और मजेदार खुलासा किया है। अपने गेम शो 'तुम हो ना - घर की सुपरस्टार' के दौरान जब एक प्रतिभागी ने उनसे पूछा कि क्या वे अपनी पत्नी मंजिरी कामतीकर से डरते हैं, तो राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे डरते नहीं हैं, बल्कि अपनी पत्नी के 'गुलाम' बनकर रहते हैं।
राजीव की 'गुलामी': सुबह की चाय से लेकर शाम के स्नैक्स तक
अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी का ज़िक्र करते हुए राजीव ने बताया कि वे प्यार में 'गुलामी' कैसे निभाते हैं:
- सुबह और शाम की चाय: "मेरी 'गुलामी' सुबह की चाय बनाने से शुरू होती है। अगर मंजिरी घर पर हैं, तो मैं उनके लिए नाश्ता बनाता हूँ और दोपहर के खाने का फैसला वही करती हैं।"
- स्पेशल चाय और स्नैक्स: राजीव ने आगे कहा, "उन्हें मेरे हाथ की बनी चाय बहुत पसंद है, इसलिए शाम की चाय भी मैं ही बनाता हूँ। शाम को 5:30 से 6:00 बजे के करीब वे बेड पर बैठकर मखाने या कुछ स्नैक्स की फरमाइश करती हैं और यह हमारा रोज़ का रूटीन है।"
राजीव का मानना है कि जब आप किसी से सच्चा प्यार करते हैं, तो उसमें एक स्वाभाविक डर और एक-दूसरे की छोटी-छोटी ज़रूरतों का ध्यान रखने की भावना अपने आप आ जाती है।
छोटे-छोटे प्रयास ही रिश्ते को मजबूत बनाते हैं: एक्सपर्ट
राजीव खंडेलवाल के इस बयान पर रिलेशनशिप कोच और साइकोथेरापिस्ट डेलना राजेश (Delnna Rrajesh) का कहना है कि राजीव ने भले ही 'गुलाम' शब्द का इस्तेमाल मज़ाक में किया हो, लेकिन सेहतमंद रिश्ते किसी की लाचारी पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से एक-दूसरे का ख्याल रखने पर टिके होते हैं।
चाय का मतलब सिर्फ चाय नहीं: किसी के लिए चाय बनाना या छोटे-छोटे काम करना यह संदेश देता है कि — "मैंने ध्यान दिया कि आप थके हुए हैं और मैं आपकी मदद करना चाहता हूँ।"
50-50 नहीं, 'इक्विटी' पर चलता है मजबूत रिश्ता
एक्सपर्ट के मुताबिक, आधुनिक रिश्तों में अक्सर यह गलतफहमी होती है कि दोनों पार्टनर को हमेशा 50-50 प्रतिशत योगदान देना चाहिए।
- जरूरत के हिसाब से सहयोग: जिंदगी में ऐसे कई दौर आते हैं जब एक पार्टनर शारीरिक या मानसिक रूप से थका होता है। ऐसे समय में बराबरी (50-50) की उम्मीद रखने के बजाय एक पार्टनर को 80% तो दूसरे को 20% संभालना पड़ता है।
- भावनात्मक सुरक्षा: जब पार्टनर को यह अहसास होता है कि उसका ख्याल रखा जा रहा है, तो इससे रिश्ते में भरोसा बढ़ता है और तनाव कम होता है।