ईरान की एयरलाइन महान एयर (Mahan Air) को कथित रूप से समर्थन देने के आरोप में अमेरिका ने भारत की एक कंपनी समेत छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) का आरोप है कि इन संस्थाओं ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को वित्तीय, लॉजिस्टिक और व्यावसायिक सहायता उपलब्ध कराई।
अमेरिका का कहना है कि IRGC को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया है और जो भी संस्था या व्यक्ति उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भारत की कंपनी पर क्या आरोप?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधों की सूची में भारत स्थित स्कीज ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। कंपनी के कार्यालय श्रीनगर और नई दिल्ली में बताए गए हैं।
अमेरिका का आरोप है कि यह कंपनी वर्ष 2020 से महान एयर की जनरल सेल्स एजेंट (GSA) के तौर पर काम कर रही थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने महान एयर की व्यावसायिक गतिविधियों में सहायता प्रदान की।
हालांकि, कंपनी या संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने क्या कहा?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था IRGC या महान एयर को वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक सहायता या व्यावसायिक सहयोग उपलब्ध कराती है, वह अमेरिकी दृष्टिकोण के अनुसार एक आतंकवादी संगठन को मदद पहुंचाने का काम करती है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार ऐसी संस्थाओं की पहचान करती रहेगी और उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करने के लिए कदम उठाएगी।
प्रतिबंधों का क्या असर होगा?
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद प्रभावित संस्थाओं की अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच सीमित हो सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को इन संस्थाओं के साथ लेनदेन करने पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका पहले भी महान एयर पर कई बार प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप रहा है कि यह एयरलाइन ईरान की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं को सहायता पहुंचाती रही है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर असर?
इस मामले में भारत स्थित कंपनी का नाम आने से कूटनीतिक और कारोबारी स्तर पर चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि, यह कार्रवाई किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों के तहत विशेष संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ की गई है।
ने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित भारतीय कंपनी इस मामले में क्या कानूनी या प्रशासनिक कदम उठाती है।