डीजीसीए ने स्पाइसजेट के चार बोइंग विमानों का पंजीकरण किया रद्द: लीजिंग कंपनी के अनुरोध पर लिया गया एक्शन, एयरलाइन ने कहा—'परिचालन पर नहीं पड़ेगा कोई असर'
नई दिल्ली: भारतीय विमानन क्षेत्र के विन्यास और कॉर्पोरेट लॉजिस्टिक्स में एक नया रणनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी स्पाइसजेट (SpiceJet) के बेड़े में शामिल चार बोइंग B737-8 विमानों का भारत में पंजीकरण विधिक रूप से रद्द कर दिया है। आधिकारिक विलेखों के अनुसार, विमान पट्टे पर देने वाली आयरलैंड की प्रसिद्ध लीजिंग फर्म 'स्काई हाई' ने गत 9 जुलाई 2026 को इन विमानों का डी-रजिस्ट्रेशन करने के लिए एक कड़ा अनुरोध पत्र भेजा था, जिसे स्वीकार करते हुए विमानन नियामक ने अगले ही दिन 10 जुलाई को सभी संबंधित हितधारकों को सांख्यिकी ईमेल भेजकर विधिक नियमों के तहत सूचित कर दिया।
इस विमानन संकट और बेड़े के सांख्यिकी विवरण पर गौर करें तो जिन चार विमानों का पंजीकरण रद्द किया गया है, उनके सामान्य तैनाती स्टेशन देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर मुस्तैद थे। इनमें से पंजीकरण संख्या VT-MAX और VT-MXA हैदराबाद में, VT-MXC अमृतसर में तथा VT-MXB राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खड़े थे। स्पाइसजेट के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने इस कड़े मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि इन चारों विमानों के इंजन के हाई प्रेशर टर्बाइन (HPT) में गंभीर तकनीकी समस्या आ गई थी, जिसके कारण ये विमान बहुत लंबे समय से सक्रिय उड़ान परिचालन और वाणिज्यिक सेवा से पूरी तरह बाहर थे।
एयरलाइन के नियमों और प्रबंधकीय दावों के अनुसार, इन जर्जर और खड़े विमानों का पंजीकरण रद्द होने से कंपनी पर मासिक पट्टे के भारी-भरकम किराये (Leasing Cost) का सांख्यिकी बोझ काफी कम होगा। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि इससे वर्तमान हवाई परिचालन के नियमों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि ये विमान पहले से ही उड़ान नहीं भर रहे थे। हालांकि, पुराने विवादों को पीछे छोड़ते हुए स्पाइसजेट प्रबंधन वर्तमान में विमान निर्माता कंपनी और पट्टादाता के साथ लगातार कूटनीतिक बातचीत कर रहा है ताकि इंजनों की मरम्मत कराकर इन्हें भविष्य में दोबारा सक्रिय सेवा के सुरक्षा कवच में वापस लाया जा सके। खेल अब पूरी तरह से इस वित्तीय लॉजिस्टिक्स सुधार और बेड़े के नए आधुनिकीकरण के विखंडनकारी नियमों पर टिका है।