बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी कांड में बड़ी कार्रवाई: आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल देहरादून से गिरफ्तार, 32 दिनों के सीसीटीवी फुटेज गायब होने से बढ़ा विवाद
सनातन आस्था के सर्वोच्च केंद्र श्री बदरीनाथ धाम के कथित चढ़ावा चोरी मामले में चमोली पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) को एक बड़ी विधिक सफलता हाथ लगी है। पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर ने रविवार रात करीब 11 बजे त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदिर समिति के वांछित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को कड़े सुरक्षा कवच के बीच बदरीनाथ लाया गया, जहां एसआईटी के आला अधिकारी उससे गुप्त स्थान पर लगातार पूछताछ कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती विलेखों और पूछताछ के दौरान आरोपी नौटियाल ने अपने ऊपर लगे चंदे की हेराफेरी के आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
इस सांख्यिकी जांच के नियमों और तकनीकी साक्ष्यों पर गौर करें तो यह पूरा विवाद तब मुस्तैद हुआ जब 2 जुलाई 2026 को मंदिर परिसर का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। सरकारी विलेखों के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी 25 जून के फुटेज में नोटों की गड्डी ले जाता हुआ विखंडनकारी रूप से दिखाई दिया था, जिसे उसने महज एक 'डायरी' होने का कड़ा दावा किया था। हालांकि, फोरेंसिक और एसआईटी जांच में यह बात सामने आई है कि वह महज पांच दिनों के भीतर आठ बार संदिग्ध लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में संलिप्त था, जिसमें 500 रुपये के नोटों के बंडल और सोने-चांदी की भेंट को परिसर से बाहर ले जाने के सांख्यिकी सबूत मिले हैं। इस बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि समिति ने पूर्व में 45 दिनों के फुटेज सुरक्षित होने का दावा किया था, लेकिन जांच टीम को केवल 13 दिनों का डेटा ही उपलब्ध कराया गया।
इस 32 दिनों के गायब सीसीटीवी फुटेज ने प्रशासनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नया पुराना विवाद मुस्तैद कर दिया है। बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि आरोपी उनका कोई निजी सहायक नहीं बल्कि एक सामान्य कर्मचारी था। वर्तमान में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति भी पूरे घटनाक्रम के नियमों की पड़ताल कर रही है, जो जल्द ही अपनी सांख्यिकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। पुलिस आज आरोपी को विधिक रूप से अदालत में पेश करेगी, और जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि इस बड़े घोटाले में कुछ अन्य रसूखदार अधिकारी भी मुस्तैद हो सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खेल अब पूरी तरह से गायब डिजिटल साक्ष्यों और एसआईटी की आगामी रिमांड रिपोर्ट के विधिक नियमों पर टिका है।