भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग: काठमांडू में 14-15 जुलाई को होगी सचिव स्तर की अहम बैठकें
भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए इस हफ्ते नेपाल की राजधानी काठमांडू में दो बेहद महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित होने जा रही हैं। नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव ने रविवार को जानकारी दी कि 14 और 15 जुलाई (मंगलवार और बुधवार) को दोनों देशों के बीच ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ (JWG) और ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ (JSC) की बैठकें होंगी।
यह बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं जब दोनों देश दक्षिण एशिया में क्लीन और रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
पावर सेक्रेटरी स्तर के प्रतिनिधिमंडल करेंगे अगुवाई
काठमांडू में होने वाली इन उच्च स्तरीय बैठकों का नेतृत्व दोनों देशों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी करेंगे:
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भारतीय प्रतिनिधिमंडल: भारत के पावर सेक्रेटरी (ऊर्जा सचिव) पंकज अग्रवाल इस बैठक में भारतीय दल की अगुवाई करेंगे।
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नेपाली प्रतिनिधिमंडल: नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी नेपाली दल का नेतृत्व करेंगी।
बैठकों का ढांचा और मुख्य एजेंडा
इन दो दिवसीय बैठकों को दो अलग-अलग स्तरों पर आयोजित किया जाएगा ताकि नीतिगत और जमीनी दोनों मुद्दों को आसानी से सुलझाया जा सके:
1. जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) की बैठक: इस बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Joint Secretary) और भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम तकनीकी और व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा का खाका तैयार करेगी।
2. जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी (JSC) की बैठक: इस मुख्य बैठक में दोनों देशों के ऊर्जा विभागों के सचिव शामिल होंगे, जो संयुक्त कार्य समूह द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी देंगे।
इन मुद्दों पर टिकी रहेंगी दोनों देशों की नजरें
अधिकारियों के मुताबिक, इन बैठकों में भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग के विभिन्न दीर्घकालिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मुख्य एजेंडे में शामिल हैं:
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क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइन्स: दोनों देशों के बीच बिजली के निर्बाध आयात-निर्यात के लिए नई और मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ाना।
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पनबिजली परियोजनाएं (Hydropower Projects): नेपाल में चल रही भारतीय पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना।
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रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग: सौर और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण MoU (सहमति पत्र) पर हस्ताक्षर किए जाने की भी पूरी संभावना है, जो दोनों देशों के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा।