भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की मजबूत ऊर्जा रणनीति: होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से निपटने के लिए तैयार है नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य हमलों ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई रुकने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, भारतीय बाजार और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि इस बार देश किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है. उद्योग जगत के विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यदि वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर कोई गंभीर व्यवधान आता भी है, तो भी भारत के पास पर्याप्त बैकअप और रणनीतिक विकल्प उपलब्ध हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के शीर्ष रिफाइनरी अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि भले ही आने वाले महीनों में आयात की लागत में उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। अगस्त तक के कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के सौदे पहले ही पक्के किए जा चुके हैं। भारत ने अपनी कूटनीतिक सूझबूझ से आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है, जिसमें रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देश प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की निर्भरता 45 प्रतिशत से घटकर महज 30 प्रतिशत रह गई है।
अल्वारेंज एंड मार्सल के प्रबंध निदेशक संतोष कामथ के अनुसार, घरेलू स्तर पर बायोफ्यूल्स और परिवहन के विद्युतीकरण (Electrification) को बढ़ावा देना दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वस्त किया है कि भारत के पास 76 से 80 दिनों तक का कुल ईंधन रिजर्व उपलब्ध है, जिसमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और रिफाइनरी स्टॉक शामिल हैं। देश की रिफाइनरियों को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड किया जा चुका है, जो किसी भी प्रकार के क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं।