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ग्लोबल बिजनेस का नया केंद्र बनेगा भारत: वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के नेतृत्व के लिए भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट पूरी तरह सक्षम, आईसीएआई अध्यक्ष का बड़ा दावा

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Posted On:Monday, July 13, 2026

ग्लोबल बिजनेस का नया केंद्र बनेगा भारत: वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के नेतृत्व के लिए भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट पूरी तरह सक्षम, आईसीएआई अध्यक्ष का बड़ा दावा

नई दिल्ली: वैश्विक कॉरपोरेट जगत में भारत की बढ़ती आर्थिक साख और तकनीकी कौशल के विन्यास को रेखांकित करते हुए भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी. ने एक बड़ा विधिक बयान दिया है। आईसीएआई ग्लोबल समिट 2026 श्रृंखला के उद्घाटन सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) का एक अभेद्य वैश्विक गढ़ बनने की विशिष्ट स्थिति में मुस्तैद है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास वह कूटनीतिक विशेषज्ञता और सुरक्षा कवच है, जिसके बल पर वे वैश्विक स्तर पर इन उच्च-मूल्य वाले केंद्रों का नेतृत्व कर सकते हैं और 'विकसित भारत 2047' के विलेखों को हकीकत में बदल सकते हैं।

इस सांख्यिकी सम्मेलन के पुराने नियमों और आर्थिक विन्यास पर गौर करें तो संस्थान की वैश्विक व्यापार एवं सेवा समिति के अध्यक्ष संजीब सांघी ने कुछ चौंकाने वाले सांख्यिकी आंकड़े प्रस्तुत किए। वर्तमान में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के भीतर 2,100 से अधिक जीसीसी मुस्तैद रूप से कार्य कर रहे हैं, जो लगभग 23.6 लाख कुशल पेशेवरों को रोजगार प्रदान करते हैं और प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब डॉलर का सांख्यिकी राजस्व अर्जित कर रहे हैं। जो कार्य कभी केवल बैक-ऑफिस सहायता तक सीमित था, वह आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण, ईएसजी (ESG) रिपोर्टिंग और व्यवसाय परिवर्तन जैसी उच्च-मूल्य सेवाओं वाले एक गतिशील लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र में बदल चुका है, जिससे पुराने विवाद पूरी तरह समाप्त हो गए हैं।

इस देशव्यापी कूटनीतिक श्रृंखला के नियमों के तहत आने वाले महीनों में अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में बड़े सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, जिसका समापन जनवरी 2027 में चेन्नई में होगा। इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य वैश्विक रोजगार के अवसरों को बढ़ाना, अनुपालन संबंधी प्रशासनिक बाधाओं को कम करना और बाजारों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है। खेल अब पूरी तरह से भारतीय पेशेवरों की डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय दक्षताओं के नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिका है, जो भारत को उच्च-मूल्य पेशेवर सेवाओं के एक विश्वसनीय और मुस्तैद वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए विधिक रूप से तत्पर है।


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