भारतीय शेयर बाजार में आज (सोमवार) से ट्रेडिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नए नियमों के तहत अब शेयर बाजार की क्लोजिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में अलग तरीके से संचालित होगी। इस बदलाव का सबसे अधिक असर उन शेयरों पर पड़ेगा, जिनमें फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) के तहत कारोबार होता है। नए नियम का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और वास्तविक मांग-आपूर्ति के आधार पर तय करना है।
अब तक निवेशकों की धारणा थी कि शेयर बाजार दोपहर 3:30 बजे पूरी तरह बंद हो जाता है, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद F&O श्रेणी के शेयरों में सामान्य खरीद-बिक्री यानी कंटीन्यूअस ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे ही समाप्त हो जाएगी। इसके बाद बाजार पूरी तरह बंद नहीं होगा, बल्कि 20 मिनट का विशेष क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session - CAS) शुरू होगा। इस विशेष सत्र के माध्यम से संबंधित शेयरों की अंतिम क्लोजिंग कीमत तय की जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक का समय ऑर्डर फ्रीज अवधि होगी। इस दौरान निवेशक कोई नया खरीद या बिक्री ऑर्डर दर्ज नहीं कर सकेंगे। इसके बाद 3:20 बजे से 3:25 बजे तक निवेशकों को मार्केट ऑर्डर और लिमिट ऑर्डर दोनों दर्ज करने की अनुमति होगी। यह चरण क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाएगा।
अंतिम चरण 3:25 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा। इस दौरान केवल लिमिट ऑर्डर ही स्वीकार किए जाएंगे। पहले से दर्ज किए गए मार्केट ऑर्डर में किसी प्रकार का संशोधन या बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के बाद संबंधित शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय होगी, जो मांग और आपूर्ति के आधार पर अधिक सटीक मानी जाएगी।
सेबी द्वारा लागू किए गए इस नए सिस्टम का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और क्लोजिंग प्राइस में संभावित हेरफेर की संभावना को कम करना है। कई बार बाजार बंद होने से ठीक पहले बड़े ऑर्डर के कारण किसी शेयर की क्लोजिंग कीमत प्रभावित हो जाती थी। अब क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के माध्यम से विभिन्न ऑर्डर को संतुलित कर अधिक निष्पक्ष मूल्य निर्धारित किया जाएगा।
इस बदलाव से विशेष रूप से डेरिवेटिव बाजार, संस्थागत निवेशकों, म्यूचुअल फंड, विदेशी निवेशकों और सक्रिय ट्रेडर्स को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि F&O कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी और वैल्यूएशन काफी हद तक क्लोजिंग प्राइस पर निर्भर करती है। वहीं, आम निवेशकों को भी बाजार बंद होने की नई प्रक्रिया को समझना जरूरी होगा ताकि वे समय पर अपने ट्रेडिंग निर्णय ले सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्लोजिंग प्राइस अधिक विश्वसनीय होगी और बाजार की निष्पक्षता में सुधार आएगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे नई समय-सारिणी और ऑर्डर नियमों को अच्छी तरह समझकर ही अपने निवेश और ट्रेडिंग की रणनीति तैयार करें।