अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर से तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। आमतौर पर ऐसे खाड़ी संकट के समय वैश्विक बाजार में अफरातफरी मच जाती है, लेकिन वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड अभी भी $100 प्रति बैरल के स्तर से नीचे (लगभग $95-97 के दायरे में) बना हुआ है। एनर्जी एनालिटिक्स फर्मों के अनुसार, मध्य पूर्व से क्रूड ऑयल का कुल निर्यात युद्ध-पूर्व के 18 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) से घटकर 11 मिलियन bpd रह गया है। इसके बावजूद कीमतों के नियंत्रित रहने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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निरंतर सप्लाई का प्रवाह: होर्मुज के जलमार्ग से आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है। यहां से औसतन 4 से 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का शिपमेंट जारी है, जिससे वैश्विक बाजार में तत्काल किल्लत नहीं बनी है।
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चीन में मांग की सुस्ती: दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देश चीन में आर्थिक सुस्ती के चलते कच्चे तेल की खपत में बड़ी गिरावट आई है, जिसने क्रूड ऑयल की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है।
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भारत का वैकल्पिक रुख: भारत ने खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए रूस से बड़े पैमाने पर आयात जारी रखा है, जो होर्मुज के बजाय सुरक्षित समुद्री रास्तों से आता है।
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वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स रास्ते: सऊदी अरामको और अन्य खाड़ी उत्पादकों ने 'शिप-टू-शिप ट्रांसफर' और लाल सागर के बजाय वैकल्पिक बंदरगाहों (जैसे रास तनुरा) से लोडिंग बढ़ा दी है।
हालांकि यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते लाल सागर रूट जोखिम भरा बना हुआ है, लेकिन चीन की नरम मांग और भारत जैसे देशों के विविधीकृत आयात ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों को $100 के पार जाने से रोक रखा है।