जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच विख्यात एक्टिविस्ट और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को आज 20 दिन पूरे हो गए हैं। लगातार जारी भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई है और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वे अत्यधिक कमजोर नजर आ रहे हैं। चिकित्सीय रिपोर्टों के अनुसार, अनशन के चलते अब तक उनका लगभग 9 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। इस बीच, वांगचुक की जान बचाने और उनका अनशन जबरन खत्म करवाने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी। इस याचिका पर आज, 16 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने बेहद अहम सुनवाई की।
अदालत की कार्यवाही के दौरान केंद्र व दिल्ली सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअली उपस्थित हुए। हाई कोर्ट द्वारा वांगचुक की सुरक्षा और सेहत से जुड़े इंतजामों पर पूछे गए सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया कि डॉक्टरों की एक टीम प्रतिदिन उनका मेडिकल चेकअप कर रही है और सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानक (विटल्स) नियंत्रण में हैं। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए खंडपीठ ने आदेश जारी किया कि सरकारी डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी करती रहे। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव जीवन अत्यंत अनमोल है, इसलिए यदि डॉक्टरों को किसी भी क्षण स्थिति चिंताजनक लगती है, तो वे तुरंत आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप (Medical Intervention) कदम उठाएं।
दूसरी तरफ, कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने समर्थकों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य अभी इतना नहीं बिगड़ा है कि जान पर बन आए, इसलिए लोग उनकी सेहत से ज्यादा आंदोलन के मुख्य उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनके भोजन कर लेने मात्र से इस जन-आंदोलन की मांगें पूरी हो जाएंगी? वांगचुक के इस दृढ़ संकल्प को मजबूती देने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आज एक दिवसीय देशव्यापी भूख हड़ताल का आयोजन किया है, जिसका मकसद छात्रों के अधिकारों और पर्यावरण से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।