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अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार धड़ाम: निवेशकों के 3 लाख करोड़ डूबे, क्रूड ₹80 के पार

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Posted On:Monday, July 13, 2026

अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार धड़ाम: निवेशकों के 3 लाख करोड़ डूबे, क्रूड ₹80 के पार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और मिसाइल-ड्रोन हमलों की खबरों ने सोमवार को घरेलू शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद करने के दावे के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 5 फीसदी का जोरदार उछाल आया है।

इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Tension) के कारण खाड़ी देशों का कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय बाजारों में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है। शुरुआती सत्र में ही शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो चुका है।

बाजार का हाल: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही लाल निशान में डूब गया। शुरुआती सत्र के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • सेंसेक्स (Sensex): कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 711.96 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,857.43 अंकों के निचले स्तर पर आ गया। जबकि यह शुक्रवार को 77,569.39 अंकों पर बंद हुआ था।

  • निफ्टी (Nifty): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी भी करीब 210 अंकों की गिरावट के साथ 24,000.20 अंकों के स्तर पर आ गया। सुबह 9:40 बजे के करीब यह 140 अंकों की गिरावट के साथ 24,044.60 पर संघर्ष करता दिखा।

  • बचने वाले शेयर: इस हाहाकार के बीच केवल टीसीएस (TCS), एचसीएल (HCL), एनटीपीसी (NTPC) और पॉवरग्रिड (Powergrid) जैसी गिनी-चुनी आईटी और एनर्जी कंपनियों को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर्स के शेयर औंधे मुंह गिरे हैं।

बाजार के टूटने के 4 मुख्य कारण

1. कच्चे तेल (Crude Oil) में उबाल: ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4% से अधिक बढ़कर 79-80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा सीधा बढ़ जाता है।

2. होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और सैन्य टकराव: रविवार को तेहरान (ईरान) द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इसके साथ ही ईरान ने दुनिया के सबसे मुख्य तेल सप्लाई रूट 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज़' को बंद करने का दावा किया, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का डर है।

3. इंडिया वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) में उछाल: बाजार में डर और अनिश्चितता को मापने वाला इंडेक्स (India VIX) लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 13.38 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच भारी घबराहट को दर्शाता है।

4. रुपये में कमजोरी और एशियाई बाजारों का दबाव: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 37 पैसे टूट गया है। इसके अलावा जापान, चीन और हांगकांग समेत तमाम एशियाई बाजारों में आई बड़ी गिरावट ने भारतीय निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और भारतीय कॉर्पोरेट्स की कमाई (Corporate Earnings) पर सीधा दबाव डाल रही हैं। जब तक खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात शांत नहीं होते, तब तक बाजार में यह अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।


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