मंगलुरु में अवैध घुसपैठ का बड़ा पर्दाफाश: जाली पहचान दस्तावेजों के साथ 8 बांग्लादेशी गिरफ्तार, खुफिया एजेंसियां सतर्क
मंगलुरु: कर्नाटक के तटीय क्षेत्र मंगलुरु में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजी फर्जीवाड़े और अवैध घुसपैठ गिरोह का भंडाफोड़ किया है। दक्षिण कन्नड़ जिले के सूरतकल के समीप मुक्का में एक निर्माणाधीन साइट पर पुलिस द्वारा चलाए गए औचक सत्यापन अभियान के दौरान आठ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक सुरक्षा जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन के नियमों के तहत यह बात सामने आई कि इन संदिग्धों के पास मौजूद भारतीय पहचान पत्र पूरी तरह से जाली थे। खुफिया ब्यूरो (IB) और स्थानीय पुलिस के लॉजिस्टिक्स विन्यास के अनुसार, यह गिरोह पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा का लाभ उठाकर भारत में अवैध रूप से दाखिल हुआ था।
जांच के विलेखों से पता चला है कि इन घुसपैठियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए एक कड़ा कूटनीतिक हथकंडा अपनाया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मूल निवासियों के वैध राष्ट्रीय पहचान पत्रों की रंगीन प्रतियों का उपयोग किया और चालाकी से उन पर अपनी तस्वीरें मुस्तैद कर दीं। हालांकि, आधुनिक सुरक्षा कवच और बायोमेट्रिक मिलान के सांख्यिकी नियमों के कारण इनका यह विखंडनकारी झूठ पकड़ा गया। पकड़े गए सभी आरोपी बांग्लादेश के राजशाही जिले के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। स्थानीय अदालत में विधिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रशासन ने इन्हें वापस भेजने (Deportation) के कड़े प्रशासनिक नियमों के तहत अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस बड़े नेटवर्क के पुराने विवादों को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय और राज्य स्तर की खुफिया टीमें अब उडुपी और तटीय कर्नाटक के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की सघन जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इस सीमा पार मानव तस्करी और जाली दस्तावेज तैयार करने के पीछे एक सुसंगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो अवैध प्रवासियों को लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करता है। खेल अब पूरी तरह से इन जाली पहचान पत्रों को बनाने वाले मुख्य एजेंटों और मास्टरमाइंड की धरपकड़ पर टिका है, ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा के नियमों को और अधिक कड़ा और अभेद्य बनाया जा सके।