मानवता के अंत का मूक गवाह 'अर्थ ब्लैक बॉक्स': तस्मानिया में मुस्तैद हो रही स्टील की विशाल चट्टान, जो दर्ज करेगी हमारे विनाश की पूरी सांख्यिकी
कल्पना कीजिए आज से एक हजार साल बाद यानी साल 3026 में जब पृथ्वी से इंसानी सभ्यता का नामोनिशान विधिक रूप से मिट चुका होगा, न कोई इंटरनेट बचेगा और न ही कोई लिखित इतिहास, तब अंतरिक्ष की किसी दूसरी दुनिया से आए खोजी दल को ऑस्ट्रेलिया के सुदूर तस्मानिया टापू पर साढ़े तीन इंच मोटे स्टील से निर्मित एक रहस्यमयी ढांचा मिलेगा। यह कोई काल्पनिक विज्ञान विन्यास नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों द्वारा मुस्तैद किया जा रहा एक कड़ा और वास्तविक प्रोजेक्ट है, जिसे 'अर्थ ब्लैक बॉक्स' (Earth's Black Box) नाम दिया गया है। सीएनएन (CNN) की सांख्यिकी रिपोर्ट के नियमों के अनुसार, इस 10 मीटर लंबे और 4 मीटर चौड़े विशालकाय इंफ्रास्ट्रक्चर का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की 'सेहत' का पल-पल का विलेख जुटाना है, ताकि भविष्य की सभ्यताओं को पता चल सके कि हमारी बर्बादी के पीछे के असली कारण क्या थे।
इस तकनीकी लॉजिस्टिक्स और भू-राजनीतिक सुरक्षा कवच पर गौर करें तो तस्मानिया के एक बेहद शांत और सपाट इलाके को इसके निर्माण के लिए चुना गया है, क्योंकि यह क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक पुराने विवादों से पूरी तरह मुक्त माना जाता है। इस प्रोजेक्ट को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के एक समूह, तस्मानिया यूनिवर्सिटी और क्लेमेंजर BBDO द्वारा संयुक्त रूप से मुस्तैद किया जा रहा है। यह ब्लैक बॉक्स पूरी तरह से सौर ऊर्जा के नियमों पर संचालित होगा, जो चौबीसों घंटे इंटरनेट से जुड़कर वैश्विक जलवायु विन्यास, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का सांख्यिकी स्तर, पिघलती बर्फ, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और जंगलों के विखंडनकारी विनाश के डेटा को लगातार रिकॉर्ड करता रहेगा। सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के बयानों और जलवायु बैठकों के खोखले वादों के विलेखों को भी अपने भीतर विधिक रूप से सुरक्षित रखेगा।
इस डेटा को भविष्य के तीन संभावित पाठकों—विनाश से बचे हुए इंसानों, पृथ्वी पर विकसित होने वाली किसी नई बुद्धिमान प्रजाति या बाहरी ग्रह के एलियंस—के लिए तीन अलग-अलग माध्यमों, जिसमें स्टील प्लेटों पर खोदे गए शिलालेख और बुनियादी डिजिटल स्टोरेज शामिल हैं, में सहेज कर रखा जाएगा। खेल अब पूरी तरह से इस मनोवैज्ञानिक रणनीति पर टिका है, क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्लैक बॉक्स भविष्य से ज्यादा आज की सरकारों पर एक कड़ा नैतिक दबाव मुस्तैद करने का काम करेगा। जब लोगों को पता होगा कि प्रकृति के खिलाफ उनका हर गलत फैसला इतिहास के पन्नों में अमिट होने जा रहा है, तो शायद वे इस ग्रह को बचाने के नियमों को लेकर अधिक गंभीर होंगे।