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रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस की नई महाडील: 'प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र' के लिए मॉस्को ने दिया सबसे एडवांस S-500 एयर डिफेंस तकनीक का मेगा ऑफर

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Posted On:Monday, July 13, 2026

रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस की नई महाडील: 'प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र' के लिए मॉस्को ने दिया सबसे एडवांस S-500 एयर डिफेंस तकनीक का मेगा ऑफर

वैश्विक रक्षा विन्यास में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को एक नया और अभेद्य सुरक्षा कवच मिलने जा रहा है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों और रक्षा अनुसंधान पब्लिकेशन 'आईडीआरडब्ल्यू' (idrw) के नियमों के अनुसार, रूस ने भारत के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र' (Mission Sudarshan Chakra) के लिए अपने दुनिया के सबसे एडवांस और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम S-500 की अत्याधुनिक तकनीकों को संयुक्त रूप से विकसित करने का एक कड़ा और बड़ा प्रस्ताव दिया है। यूक्रेन युद्ध के चलते उत्पन्न हुए हालिया सैन्य लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्राथमिकताओं के कारण रूस ने सीधे तौर पर तैयार S-500 सिस्टम बेचने के पुराने नियमों में विधिक बदलाव किया है। इसके बजाय, मॉस्को ने अब नई दिल्ली के साथ मिलकर इस अगली पीढ़ी की मिसाइल रोधी क्षमताओं और कूटनीतिक तकनीकों का सह-विकास (Co-development) करने का प्रस्ताव मुस्तैद किया है।

इस सांख्यिकी रक्षा विलेख और सामरिक योजना पर गौर करें तो भारत आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों के तहत अपना एक विशाल, इंटरlocked और मल्टी-लेयर्ड नेशनल एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार कर रहा है। रूस की इस नई पेशकश के बाद S-500 की विखंडनकारी हाइपरसोनिक और स्पेस-ब्लास्टिंग क्षमताएं भारत के वर्तमान और भविष्य के हवाई सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का एक विधिक हिस्सा बन सकेंगी। 'प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र' के तहत यह संयुक्त आर्किटेक्चर पहले से मौजूद रूसी S-400 स्क्वाड्रन और डीआरडीओ (DRDO) के स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुशा' (लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस) के साथ मिलकर एक अभेद्य दीवार की तरह काम करेगा, जिससे सीमा पर पुराने विवाद पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि S-500 की उन्नत तकनीकों के एकीकरण से भारतीय सेनाओं के पास दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट्स, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन स्वार्म्स और सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक हथियारों को अंतरिक्ष की सीमा पर ही मार गिराने का अचूक सांख्यिकी निवारक (Deterrent) मुस्तैद हो जाएगा। भारत पहले ही अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) फेज-1 के तहत एक्सो और एंडो-एटमॉस्फेरिक परतों में सुरक्षा कवच तैनात कर चुका है। खेल अब पूरी तरह से इस व्यापक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) के विधिक नियमों पर टिका है, जो यह साबित करता है कि भारत का सबसे पुराना रणनीतिक दोस्त रूस अब केवल एक विक्रेता न रहकर भारत के भविष्य के मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का एक मुस्तैद और कूटनीतिक भागीदार बनने के लिए पूरी तरह तत्पर है।


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