मुंबई: भारत के दूरसंचार और तकनीकी परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी नवीनतम पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी (PCT) की वैश्विक रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स ने अभूतपूर्व प्रगति दर्ज करते हुए दुनिया की शीर्ष 20 तकनीकी कंपनियों की प्रतिष्ठित सूची में अपनी विधिक जगह बना ली है। कंपनी ने रविवार को एक आधिकारिक विलेख जारी कर बताया कि वह वर्ष 2025 की रैंकिंग में 320वें पायदान पर थी, जहां से एक लंबी छलांग लगाकर वह सीधे 20वें स्थान पर पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक माइलस्टोन के साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह अनुषंगी इकाई सैमसंग, हुआवेई, क्वालकॉम, एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे वैश्विक डीप-टेक दिग्गजों के विखंडन क्लब में शामिल होने वाली एकमात्र भारतीय इनोवेटर बन गई है।
जियो की यह विस्मयकारी उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर पेटेंट फाइलिंग की विकास दर मात्र एक प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई थी। जियो की पेटेंट फाइलिंग मुख्य रूप से अगली पीढ़ी की अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों जैसे 5G एडवांस्ड, एआई-नेटिव नेटवर्क, क्लाउड कंप्यूटिंग, एज इंटेलिजेंस, नेटवर्क स्लाइसिंग और आगामी 6G इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। आधिकारिक विलेखों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक रिलायंस जियो ने दुनिया भर में कुल 6,817 पेटेंट आवेदनों का विधिक पंजीकरण कराया है, जिनमें से 2,393 भारत में और 4,424 विदेशी बाजारों में दर्ज हैं। इनमें से कंपनी को अब तक कुल 1,009 पेटेंटों की विधिक स्वीकृति भी मिल चुकी है, जो भारत की स्वदेशी अनुसंधान और विकास (R&D) क्षमता की वैश्विक मजबूती को प्रमाणित करती है।
इस ऐतिहासिक वैश्विक मान्यता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आकाश एम. अंबानी ने इस विलेख गौरव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह रैंकिंग भारत को केवल वैश्विक तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका निर्माता, मालिक और निर्यातक बनाने की दिशा में हमारे कड़े विखंडन प्रयासों का प्रतिफल है। जियो वर्तमान में सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एजेंटिक एआई (Agentic AI) जैसी भविष्योन्मुखी तकनीकों पर आधारित अपने नए प्रोजेक्ट 'जियोब्रेन' (JioBrain) पर विधिक रूप से कार्य कर रही है, जो आने वाले समय में देश को एक ग्लोबल डीप-टेक पावरहाउस के रूप में मजबूती से स्थापित करेगा।