ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: भाला फेंक में फिर दिखेगी नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की ऐतिहासिक जंग, श्रीलंकाई खिलाड़ी के उभरने से मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
ग्लासगो: वैश्विक एथलेटिक्स विन्यास और विशेषकर दक्षिण एशियाई खेल इतिहास में एक बार फिर रोमांच का कड़ा ज्वार भाटा आने वाला है। पाकिस्तान के मौजूदा ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) चैंपियन अरशद नदीम ने विधिक रूप से पुष्टि कर दी है कि स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले महाकुंभ से ठीक पहले वह स्विट्जरलैंड में एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से अपने नए सत्र की शुरुआत करेंगे। लाहौर में कड़े प्रशिक्षण के बाद नदीम ने पाकिस्तानी मीडिया विलेख में माना है कि बर्मिंघम 2022 में 90.18 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतने के चार साल बाद, इस बार उन पर खिताब बचाने का एक भारी सांख्यिकी दबाव मुस्तैद है।
इस खेल लॉजिस्टिक्स और एथलीटों के पुराने विवादों पर गौर करें तो भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की आपसी प्रतिद्वंद्विता वर्तमान में खेल जगत की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक है। हालांकि आमने-सामने के सांख्यिकी मुकाबलों में नीरज चोपड़ा 10-1 से आगे चल रहे हैं, लेकिन पेरिस 2024 ओलंपिक में नदीम द्वारा 92.97 मीटर के नए ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतना खेल इतिहास की सबसे विखंडनकारी फतह मानी जाती है। बर्मिंघम में चोट के कारण नीरज हिस्सा नहीं ले पाए थे, लेकिन इस बार ग्लासगो का मुकाबला 'ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप' के नियमों से कमतर नहीं होने वाला है, जिसके लिए नीरज चोपड़ा ने भी अपनी अभेद्य सुरक्षा कवच जैसी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
इस बार दक्षिण एशियाई वर्चस्व की इस कूटनीतिक लड़ाई में श्रीलंका के रुमेश पथिरगे के उभरने से एक नया और विखंडनकारी मोड़ आ गया है। पथिरगे ने हाल ही में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंककर और दोहा डायमंड लीग जीतकर इस साल पुरुषों की जैवलिन थ्रो में शीर्ष स्थान मुस्तैद किया है। खेल मंत्रालयों के सांख्यिकी इनपुट के अनुसार, तीन दिग्गजों की यह भिड़ंत खेल के नियमों और रोमांच को चरम पर ले जाएगी। खेल अब पूरी तरह से स्विट्जरलैंड के इस आगामी वार्म-अप इवेंट और ग्लासगो की मुख्य स्पर्धा के विधिक नियमों पर टिका है, जो वैश्विक मंच पर नए कीर्तिमानों का निर्धारण करेगा।