भारत की राजधानी नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक मेजबानी करने जा रही है। 11 सदस्य देशों का यह वैश्विक मंच दुनिया की लगभग 45 प्रतिशत आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे नए सदस्यों की मौजूदगी इस सम्मेलन को बेहद खास बना रही है।
इस बार नई दिल्ली शिखर सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 'ब्रिक्स पे' (BRICS Pay) प्रणाली और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के एकीकरण का प्रस्ताव है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बीच ब्रिक्स देश सीमा पार भुगतान को अधिक सुलभ, सुरक्षित और तीव्र बनाने पर जोर दे रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के बीच व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाना और स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में सीधे लेनदेन को बढ़ावा देना है।
अलग 'ब्रिक्स मुद्रा' (BRICS Currency) बनाने के विचारों पर भारत का रुख बेहद स्पष्ट और व्यावहारिक रहा है। भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा करने वाली किसी नई आरक्षित मुद्रा के बजाय डिजिटलीकरण और स्थानीय मुद्रा व्यापार तंत्र को सशक्त करने का पक्षधर है। भारत की यूपीआई (UPI) तकनीक की सफलता के आधार पर निर्मित BRICS Pay के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को बिना किसी विनिमय शुल्क (Currency Conversion Fee) के तुरंत भुगतान प्राप्त हो सकेगा, जिससे भारत के द्विपक्षीय व्यापार को अभूतपूर्व गति मिलेगी।