आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन से पहले पेंशन संशोधन को लेकर देश भर के करीब 69 लाख रक्षा और सिविलियन पेंशनभोगियों के मन में उठ रही आशंकाओं पर विराम लग गया है। 'रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन' ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह संदेह व्यक्त किया था कि वेतन आयोग के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) के बिंदु 2(e) में 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) धारकों के पेंशन रिवीजन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इस भाषा पर आपत्ति जताते हुए संगठन ने फिटमेंट फैक्टर के तहत मिलने वाले लाभों पर स्पष्टीकरण की मांग की थी।
पेंशनभोगियों के इस भ्रम पर विराम लगाते हुए ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन आयोग के ToR के बिंदु 2(f) में 'अनफंडेड कॉस्ट ऑफ नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम्स' (Unfunded cost of non-contributory pension schemes) का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। इसका सीधा और कानूनी अर्थ यह है कि बिना किसी व्यक्तिगत अंशदान वाली पुरानी पेंशन योजना (OPS) के सभी लाभार्थी इस आयोग के दायरे में पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
डॉ. पटेल के अनुसार, जिस तरह कार्यरत कर्मचारियों के लिए अलग से विशिष्ट उल्लेख की आवश्यकता नहीं होती, उसी प्रकार पुराने पेंशनर्स के लिए भी किसी अतिरिक्त नियम संशोधन की जरूरत नहीं है। 8वें वेतन आयोग द्वारा तय किए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर, पेंशन संशोधन और महंगाई राहत (DR) का पूरा लाभ 1 जनवरी 2026 से पहले और बाद में रिटायर होने वाले सभी पात्र पेंशनभोगियों को नियमानुसार मिलेगा।