भारतीय बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की जोरदार वापसी: जुलाई में अब तक 25,531 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश, इक्विटी और डेट में लिवाली तेज
मुंबई: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विभिन्न कूटनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय सर्राफा और वित्तीय बाजारों के विन्यास में एक बड़ा सकारात्मक मोड़ देखा गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने चालू माह जुलाई 2026 के शुरुआती दस दिनों में ही भारतीय पूंजी बाजार के इंफ्रास्ट्रक्चर में 25,531 करोड़ रुपये का भारी-भरकम शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) किया है। यह लगातार दूसरा सांख्यिकी महीना है जब विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू बाजार में लिवाल के तौर पर अपनी मुस्तैद स्थिति दर्ज कराई है। इससे पहले जून के कालक्रम में भी एफपीआई ने भारतीय बाजार के सुरक्षा कवच को मजबूत करते हुए 4,699 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज कराया था।
इस सांख्यिकी विलेख और बाजार के नियमों पर गौर करें तो 1 जुलाई से 10 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा भारतीय इक्विटी (शेयर बाजार) पर जताया है, जहां 15,157 करोड़ रुपये का कड़ा निवेश किया गया है। इसके अलावा, ऋण बाजार (डेट सेगमेंट) के लॉजिस्टिक्स को नया बल देते हुए उन्होंने 8,569 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की है। म्यूचुअल फंड और हाइब्रिड वित्तीय उपकरणों के नियमों के तहत भी क्रमशः 883 करोड़ रुपये और 52 करोड़ रुपये का कूटनीतिक निवेश मुस्तैद किया गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि चालू तिमाही के नतीजों और स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतकों ने वैश्विक कोषों को भारतीय परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया है।
हालांकि, चालू वर्ष के व्यापक ऐतिहासिक विन्यास को देखें तो एफपीआई ने कुल मिलाकर भारतीय बाजार से अब तक 1,88,690 करोड़ रुपये की सांख्यिकी निकासी भी की है, जिसमें इक्विटी सेगमेंट में उनके पुराने विवादों और बिकवाली के कारण 2,59,116 करोड़ रुपये की कमी शामिल है। खेल अब पूरी तरह से आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों और भू-राजनीतिक तनाव के कड़े लॉजिस्टिक्स पर निर्भर है, लेकिन जुलाई में आई यह विखंडनकारी तेजी भारतीय सूचकांकों को एक विधिक और मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करने में पूरी तरह मुस्तैद दिख रही है।