लंदन: ऑल इंग्लैंड क्लब के मैदान पर चल रहे एकमात्र ऐतिहासिक टेस्ट मैच के तीसरे दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने उत्कृष्ट रणनीतिक विन्यास और ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर मुकाबले पर अपनी विधिक पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। मैच के सांख्यिकी कालक्रम और घटनाक्रम के नियमों पर गौर करें तो भारत द्वारा दिए गए 457 रनों के कड़े और विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की दूसरी पारी केवल 130 रनों के स्कोर पर 6 विकेट खोकर गहरे संकट में मुस्तैद हो गई है। मेजबान टीम को ऐतिहासिक हार से बचने और जीत दर्ज करने के लिए अभी भी 327 रनों के कड़े लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता है, जबकि भारतीय टीम एक यादगार विदेशी जीत से मात्र 4 विकेट दूर खड़ी है।
इस महत्वपूर्ण मुकाबले के पुराने नियमों और पारी के विलेखों के अनुसार, भारतीय महिला टीम ने अपनी दूसरी पारी 7 विकेट पर 341 रन बनाकर घोषित की, जिसमें पहली पारी के आधार पर मिली 115 रनों की कूटनीतिक बढ़त भी शामिल थी। कल के स्कोर 154/1 से आगे खेलते हुए भारतीय मध्यक्रम हालांकि पुराने विवादों और निरंतर विकेट गिरने के कारण थोड़ा लड़खड़ाया, जहां स्मृति मंधाना (70) अपने खाते में केवल एक रन और जोड़ सकीं। कप्तान हरमनप्रीत कौर (16) और दीप्ति शर्मा (10) जैसी स्थापित बल्लेबाज भी सस्ते में पवेलियन लौट गईं, लेकिन दूसरे छोर पर विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करते हुए 158 गेंदों में 14 चौकों की मदद से 113 रनों की एक विखंडनकारी शतकीय पारी खेली। पारी के अंतिम क्षणों में ऋचा घोष (नाबाद 50) ने मुस्तैद अर्धशतक जड़कर टीम के स्कोरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी।
इसके बाद, लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही और भारतीय गेंदबाजों के कड़े आक्रमण के सामने मात्र 6 रन के सांख्यिकी स्कोर पर उसके दोनों सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। कप्तान हीथर नाइट (13) और नेट साइवर ब्रंट (11) जैसी अनुभवी खिलाड़ी भी भारतीय स्पिन और गति के जाल में विखंडित हो गईं। भारतीय टीम की ओर से सायली सातघरे, क्रांति गौड़ और स्नेह राणा ने दो-दो विकेट लेकर विपक्षी टीम के मध्यक्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। खेल अब चौथे दिन के शुरुआती सत्र के नियमों पर टिका है, जहां भारतीय स्पिनर्स खेल को समाप्त कर इतिहास रचने के कूटनीतिक प्रयास में मुस्तैद रहेंगे।