ताजा खबर

हथेली के बराबर रोबोट ने सुलझाई जापान के मून लैंडर की मिस्ट्री, चांद पर 'उल्टा' गिरा था अंतरिक्ष यान

Photo Source :

Posted On:Saturday, June 13, 2026

अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक अनोखी और दिलचस्प सफलता सामने आई है। स्टार वॉर्स (Star Wars) फिल्म के प्रसिद्ध 'BB-8' ड्रॉइड जैसा दिखने वाला एक छोटा, रूप बदलने वाला (shape-shifting) रोबोट जापान के मून मिशन के लिए सबसे बड़ा मसीहा बनकर उभरा है।

इस हथेली के आकार के नन्हे रोबोट ने वैज्ञानिकों के लिए उस बड़ी पहेली को सुलझा दिया है, जिसने जापान के मून लैंडर मिशन को संकट में डाल दिया था। साइंस रोबोटिक्स (Science Robotics) जर्नल में प्रकाशित एक नई रिसर्च में इस रोमांचक मिशन की पूरी कहानी सामने आई है।
क्या था जापान का मून मिशन और संकट?
जनवरी 2024 में जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (JAXA) ने अपने स्लिम (SLIM - Smart Lander for Investigating Moon) स्पेसक्राफ्ट को चांद पर उतारा था। इस सफल लैंडिंग के साथ ही जापान दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन गया जिसने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की।
लेकिन इस ऐतिहासिक कामयाबी के तुरंत बाद वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई। लैंडर के चांद पर उतरते ही इंजीनियर्स ने पाया कि स्लिम लैंडर के सोलर पैनल काम नहीं कर रहे थे और वह बिजली (Power) बनाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा था। पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिक समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर सब कुछ ठीक होने के बाद भी सोलर पैनल सूरज की रोशनी क्यों नहीं पकड़ पा रहे हैं।
नन्हे रोबोट LEV-2 की एंट्री और कमाल
इसी संकट के बीच काम आया स्लिम लैंडर के साथ भेजा गया एक नन्हा रोबोट, जिसका नाम LEV-2 (Palm-Sized Lunar Excursion Vehicle 2) है। यह रोबोट आकार में एक गेंद या खिलौने जैसा है, जिसे जाक्सा ने खिलौना बनाने वाली मशहूर कंपनी Takara Tomy और Sony के साथ मिलकर तैयार किया था।

जैसे ही मुख्य लैंडर की बैटरी खत्म होने लगी, उसने इस छोटे रोबोट को चांद की सतह पर रिलीज कर दिया। इस नन्हे रोबोट ने कमाल की तकनीक का प्रदर्शन किया:
  • रूप बदलने की कला: चंद्रमा की सतह पर गिरते ही इस गोल गेंद जैसे रोबोट ने अपना आकार बदला और पहियों वाली एक छोटी गाड़ी (crawling vehicle) के रूप में तब्दील हो गया।
  • ऐतिहासिक तस्वीर: यह रोबोट चांद की धूल पर रेंगते हुए आगे बढ़ा और उसने मुख्य स्लिम (SLIM) लैंडर की एक ऐतिहासिक तस्वीर खींची।
  • खुल गया राज: जब यह तस्वीर पृथ्वी पर वैज्ञानिकों के पास पहुंची, तो रहस्य से पर्दा उठ गया। तस्वीर में साफ दिख रहा था कि जापानी लैंडर चांद पर सीधा खड़े होने के बजाय पूरी तरह से सिर के बल यानी 'उल्टा' (upside down) गिरा था। इसी वजह से उसके सोलर पैनल गलत दिशा में मुड़ गए थे और काम नहीं कर रहे थे।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई उम्मीद
यह छोटा रोबोट चांद की भीषण ठंड और कठिन परिस्थितियों के बीच केवल 100 मिनट तक ही जीवित रह सका। उसने अपने साथी रोबोट LEV-1 (जो हॉपिंग यानी कूदकर चलने वाला रोबोट था) की मदद से सारी जानकारी और तस्वीरें पृथ्वी तक पहुंचाईं और फिर हमेशा के लिए शांत हो गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही इस रोबोट का जीवनकाल बहुत छोटा था, लेकिन इसने अंतरिक्ष विज्ञान में एक बड़ा रास्ता दिखा दिया है। बड़े और भारी-भरकम रोवर (Rovers) हर जगह नहीं जा सकते और उनके खराब होने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में भविष्य के मून और मार्स (मंगल) मिशनों में मुख्य अंतरिक्ष यान के मददगार के रूप में ऐसे कई छोटे, सस्ते और स्वायत्त (autonomous) रोबोट्स को एक साथ भेजा जा सकता है, जो मुख्य यान के खराब होने पर भी स्वतंत्र रूप से रिसर्च और तस्वीरें भेजने का काम जारी रख सकें।


बनारस और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. banarasvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.