नई दिल्ली: आगामी महत्वपूर्ण विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले भारतीय राजनीति के विखंडन परिदृश्य में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने पार्टी के मूल वैचारिक सिद्धांतों से अलग होकर अपने नए क्षेत्रीय दल या गुट बनाने वाले पुराने वरिष्ठ सदस्यों और नेताओं को दोबारा मुख्यधारा के संगठन में शामिल करने की विलेख इच्छा व्यक्त की है। नई दिल्ली स्थित २४ अकबर रोड मुख्यालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने दल के विच्छेद ढांचे को कूटनीतिक रूप से पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले पुराने चेहरों को एकजुट करने के लिए एक विशेष आंतरिक ग्रिड योजना तैयार की है। जनता के बीच विभिन्न राजनीतिक धड़ों के विलय को लेकर बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं और कयासों के बीच आलाकमान का यह रुख बेहद कूटनीतिक माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी संगठन में यह विखंडन सुधार विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय क्षत्रपों की बढ़ती ताकत को संतुलित करने और राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक विलेख ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। एआईसीसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, जो नेता अतीत में किन्हीं रणनीतिक मतभेदों के चलते अलग हुए थे, लेकिन जिनकी वैचारिक निष्ठा आज भी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है, उनके विधिक प्रवेश के लिए पार्टी के दरवाजे पूरी तरह से खुले हैं। संगठन के इस समावेशी ग्रिड दृष्टिकोण से न केवल जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत होगा, बल्कि विभिन्न राज्यों की प्रादेशिक कांग्रेस कमेटियों (PCC) को एक नई सांगठनिक ऊर्जा भी मिलेगी। इसके तहत आने वाले हफ्तों में कई प्रमुख पूर्व सदस्यों के औपचारिक विलय की विलेख घोषणाएं होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।