पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पिछले कई दिनों से जारी नागरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों ने अब एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। इस क्षेत्र में चल रही बड़ी रैलियों और जन-प्रदर्शनों में अब एक ऐसा नारा तेजी से गूंज रहा है, जिसने इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय) की रातों की नींद उड़ा दी है। वह नारा है: ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।’
दिलचस्प और गंभीर बात यह है कि यह नारा ऐतिहासिक रूप से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ और खैबर पख्तूनख्वा में 'पश्तून तहफुज मूवमेंट' (PTM) द्वारा लगाया जाता रहा है। लेकिन अब PoJK के स्थानीय लोग भी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इसी नारे का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं, जो क्षेत्र में सेना के प्रति चरम पर पहुंचे गुस्से को दर्शाता है।
हक मांगने वालों को बताया जा रहा 'आतंकवादी': सरदार अमन खान
PoJK में हजारों प्रदर्शनकारियों और एक्टिविस्ट्स को संबोधित करते हुए स्थानीय नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सेना और वहां की संघीय सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने राज्य प्रायोजित दमन पर बोलते हुए कहा:
"यह बेहद शर्मनाक है कि जो लोग अपने बच्चों के लिए अच्छे अस्पताल, युवाओं के लिए रोजगार, खाने के लिए रोटी और अपने बुनियादी मानवाधिकारों की मांग कर रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियां ‘आतंकवादी’ घोषित कर रही हैं।"
सरदार अमन खान ने आगे कहा कि बलूचिस्तान के लोगों से जाकर पूछिए कि असली आतंकवादी कौन हैं, वे सीधे सेना की वर्दी की तरफ उंगली उठाएंगे। खैबर पख्तूनख्वा के लोगों का भी यही दर्द है। अब सिंध, पंजाब और खुद PoJK के लोग भी खुलकर यह मानने लगे हैं कि आम जनता के बीच असली डर और दहशत का माहौल किसी और ने नहीं, बल्कि वर्दी वालों (पाकिस्तानी सेना) ने पैदा किया है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
PoJK में हालिया महीनों में बढ़े इस जनांदोलन के पीछे लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और राजनीतिक उपेक्षा है। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं:
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राजनीतिक स्वायत्तता और अधिकार: क्षेत्र में इस्लामाबाद के सीधे हस्तक्षेप को बंद करना और वास्तविक राजनीतिक अधिकार देना।
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आर्थिक राहत और महंगाई से मुक्ति: आटे (रोटी) पर मिलने वाली सब्सिडी को बहाल करना और बिजली के आसमान छूते बिलों को कम करना।
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बुनियादी ढांचा और रोजगार: स्थानीय युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर पैदा करना और अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों की स्थिति सुधारना।
क्षेत्र में कई जगहों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो चुकी है कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों और अत्याधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षा बलों (जैसे पंजाब रेंजर्स और स्थानीय पुलिस) के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिली हैं।
JKJAAC पर प्रतिबंध की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की निंदा
इस बीच, मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर पाकिस्तान सरकार को घेरा है। एमनेस्टी ने पाकिस्तान सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAAC) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत एक “प्रतिबंधित संगठन” घोषित करने के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
एमनेस्टी ने इस सरकारी कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी, अलोकतांत्रिक और जरूरत से ज्यादा क्रूर व कठोर बताया है। संस्था का कहना है कि यह कदम शांतिपूर्ण ढंग से संगठन बनाने की आजादी और लोकतांत्रिक व राजनैतिक गतिविधियों पर एक सीधा और गहरा हमला है। गौरतलब है कि यह प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तब और तेज की गई जब इलाके की स्थानीय विधानसभा के गठन और प्रशासनिक सुधारों को लेकर JKJAAC के नेताओं और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत पूरी तरह से विफल हो गई।