भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा के अचानक निधन से पूरा देश और खेल जगत गहरे सदमे में है। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित शूटिंग वर्ल्ड कप से 1 जून को वतन लौटने के बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज और सफल सर्जरी के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अब उनके निधन को लेकर मैक्स अस्पताल के कार्डियक साइंसेज के ग्रुप चेयरमैन और चीफ ऑफ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. बलबीर सिंह का एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने देरी से इलाज मिलने और लापरवाही को मुख्य वजह बताया है।
तीन दिन पुराना था हार्ट अटैक, सफर के दौरान करते रहे नजरअंदाज
डॉ. बलबीर सिंह के मुताबिक, जब जसपाल राणा को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक हो चुकी थी। जांच में जो बातें सामने आईं, वे बेहद डराने वाली हैं:
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3 दिन पुराना अटैक: डॉ. सिंह ने बताया कि जब राणा अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें एक गंभीर हार्ट अटैक पहले ही आ चुका था, जो करीब तीन दिन पुराना था।
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यात्रा में अनदेखी: वह लगातार जर्मनी से भारत की यात्रा कर रहे थे और इस दौरान उनके सीने में लगातार तेज दर्द बना हुआ था, जिसे उन्होंने सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया।
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पूरी तरह ब्लॉक थी आर्टरी: अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि जिस मुख्य आर्टरी (Main Arterial Line) की वजह से उन्हें हार्ट अटैक आया था, वह 100% ब्लॉक हो चुकी थी।
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हार्ट फेलियर की स्थिति: इलाज में बहुत ज्यादा देरी होने के कारण उनके दिल की मांसपेशियों को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे दिल की पंपिंग क्षमता बेहद कमजोर हो गई थी और वे 'हार्ट फेलियर' की स्थिति में पहुंच चुके थे।
डिस्चार्ज होने वाले थे, लेकिन सोते समय हुआ 'कार्डियक रप्चर'
डॉ. बलबीर सिंह ने एक बेहद महत्वपूर्ण और गंभीर मेडिकल कंडीशन का जिक्र करते हुए बताया कि जो मरीज हार्ट अटैक आने के काफी समय बाद अस्पताल पहुंचते हैं, उनमें ‘कार्डियक रप्चर’ (Cardiac Rupture - दिल की दीवार या मांसपेशियों का फटना) जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसमें मरीज की अचानक मौत हो सकती है।
किस्मत का क्रूर खेल: डॉक्टरों ने राणा की स्थिति को देखते हुए तुरंत उनकी इमरजेंसी सर्जरी की थी और एक स्टेंट लगाया था। इलाज के बाद उनकी सेहत में चमत्कारी रूप से काफी सुधार हुआ था। स्थिति इतनी सामान्य हो गई थी कि आज उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी) किया जाना था। पूरा परिवार उन्हें घर ले जाने की तैयारी में था, लेकिन दुर्भाग्यवश सोते समय अचानक उन्हें 'कार्डियक रप्चर' हुआ और उन्होंने नींद में ही अंतिम सांस ली।
जसपाल राणा का यह मामला इस बात का बड़ा सबक है कि सीने में होने वाले किसी भी दर्द या बेचैनी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर यात्रा के दौरान।